‘चंद अध्यापक-अध्यापिकाओं द्वारा’ छात्र-छात्राओं पर अत्याचार!

punjabkesari.in Tuesday, Sep 08, 2026 - 02:47 AM (IST)

जीवन में माता-पिता के बाद ‘गुरुओं’ अर्थात अध्यापक-अध्यापिकाओं का ही सर्वोच्च स्थान माना गया है। वही बच्चों को सही शिक्षा देकर ज्ञानवान बनाते हैं परंतु आज चंद अध्यापक-अध्यापिकाएं अपनी मर्यादा को भूलकर छात्र-छात्राओं पर अमानवीय अत्याचार और उनका यौन शोषण तक कर रहे हैं जो पिछले लगभग साढ़े तीन महीनों की निम्न घटनाओं से स्पष्ट है : 

* 14 मई को ‘चरायदेव’ (असम) के ‘मथुरापुर बगीचा’ स्थित एक स्कूल में ‘आरिफुल इस्लाम’ नामक अध्यापक को कई बच्चों को बेरहमी से पीटने और एक बच्चे को उठाकर खिड़की से बाहर फैंकने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
* 30 जून को ‘अहमदाबाद’ (गुजरात) के एक स्कूल में पी.टी. के दौरान ‘लक्ष्मण’ नामक अध्यापक ने दसवीं कक्षा के एक छात्र को इतने जोर से थप्पड़ मारा कि उसके कान का पर्दा फट गया और खून बहने लगा। 
* 31 जुलाई को ‘फिरोजाबाद’ (उत्तर प्रदेश) में एक स्कूल की  अध्यापिका ने गुस्से में आकर पहले 4 वर्षीय छोटे बच्चे की आंख में पैंसिल घोंप कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया और फिर उसके बड़े भाई को किसी बात पर गुस्से में आकर इतने जोर से थप्पड़ मारा कि उसके कान से खून बहने लगा जिस पर पुलिस ने अध्यापिका के विरुद्ध केस दर्ज किया।  

* 31 जुलाई को ही ‘कुशीनगर’ (उत्तर प्रदेश) में एक कोचिंग सैंटर के अध्यापक द्वारा एक नाबालिग छात्रा के साथ अश्लील हरकतें और छेड़छाड़ करने का मामला सामने आया। जब छात्रा ने यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो परिजनों ने कोचिंग सैंटर पहुंचकर आरोपी शिक्षक को चप्पलों से पीटा और माफी मंगवाने के बाद पुलिस के हवाले कर दिया।
* 18 अगस्त को ‘जाफराबाद’ (दिल्ली) में एक प्ले-वे स्कूल में एक छोटे बच्चे को कुर्सी से बांध कर थप्पड़ मारने और कान खींचने का मामला सामने आया। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में ‘पोक्सो’ और ‘जुवेनाइल जस्टिस एक्ट’ के अंतर्गत एफ.आई.आर. दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया।

* 21 अगस्त को ‘विशाखापट्टïनम’ (आंध्र प्रदेश) के एक स्कूल में एक 6 वर्षीय छात्रा ‘तमन्ना’ को होमवर्क पूरा न करने पर उसकी अध्यापिका ने इतनी बेरहमी से थप्पड़ मारा कि वह बेहोश होकर गिर पड़ी और अस्पताल ले जाने पर डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
* 27 अगस्त को ‘पूर्वी विनोद नगर’ (दिल्ली) के एक स्कूल में पुस्तक न लाने पर एक अध्यापिका द्वारा पीटने और धूप में खड़ी करने के बाद 7वीं कक्षा की 10 वर्षीय छात्रा ‘अवनी’ की तबीयत बिगड़ जाने से अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
* 29 अगस्त को ‘हस्तिनापुर’ (मेरठ, उत्तर प्रदेश) के एक स्कूल में एक अध्यापक द्वारा एक छात्र की बेरहमी से पिटाई करने और मात्र 40 सैकेंड के भीतर 17 थप्पड़ मारने का मामला सामने आया।
* 29 अगस्त को ही ‘आदिलाबाद’ (तेलंगाना) के ‘बोथ’ कस्बे के ‘वेदम स्कूल’ में पुलिस ने नर्सरी के एक 4 वर्षीय छात्र को उसकी अध्यापिका द्वारा काफी देर तक उसे बेरहमी से पीटने, थप्पड़ मारने और छड़ी से पीटने के लिए अध्यापिका और स्कूल प्रबंधन के विरुद्ध मामला दर्ज किया।

* 30 अगस्त को ‘हरदोई’ (उत्तर प्रदेश) में ‘साहुआपुर’ के एक स्कूल में आठवीं कक्षा की एक छात्रा द्वारा अपने अध्यापक के पास अपनी सहपाठी से हुए विवाद की शिकायत करने पर अध्यापक ‘राजेंद्र कुमार गंगवार’ ने उलटे उसी के दोनों हाथ मरोड़ दिए और मारपीट की। गंभीर चोटों के कारण अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत के बाद अध्यापक को निलंबित कर उसके विरुद्ध गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है। 
* और अब 4 सितम्बर को ‘बक्सर’ (बिहार) के गांव ‘नथनी अहीर के डेरा’ के सरकारी स्कूल को 2 अध्यापकों को स्कूल की नाबालिग छात्राओं के यौन शोषण के आरोप में निलम्बित तथा मामला छुपाने के आरोप में स्कूल के हैडमास्टर को गिरफ्तार किया गया है। कानूनी तौर पर बच्चों को शारीरिक दंड देने पर मनाही के बावजूद अध्यापक-अध्यापिकाओं के एक वर्ग द्वारा मासूम बच्चे-बच्चियों पर इस तरह के अत्याचार करना कतई उचित नहीं है। अत: ऐसे अध्यापक-अध्यापिकाओं को कठोरतम सजा दी जानी चाहिए ताकि बच्चों के उत्पीडऩ का यह दुष्चक्र रुके और अध्यापक वर्ग भी बदनाम न हो।-विजय कुमार


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