चुनाव नजदीक आते ही उत्तर प्रदेश में दोषारोपण हुए तेज

punjabkesari.in Tuesday, Dec 07, 2021 - 04:05 AM (IST)

अगले वर्ष होने वाले उत्तर प्रदेश के चुनावों में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ भाजपा और सत्ता पर कब्जा करने के लिए प्रयत्नशील समाजवादी पार्टी में है जबकि बसपा और कांग्रेस भी अकेली ही यथासंभव जोर लगा रही हैं। अपनी विजय के प्रति आश्वस्त भाजपा की चुनावी रणनीति का ब्लू प्रिंट तैयार करने वाले पार्टी के चाणक्य और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जोर देकर कहा है कि ‘‘यदि बूथ मजबूत होगा तो ‘300 प्लस’ का आंकड़ा छूने में पार्टी को कोई दिक्कत नहीं होगी।’’ 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दावा किया है कि ‘‘भाजपा प्रदेश में एक बार फिर बहुमत से सरकार बनाएगी और 325 से अधिक सीटें जीतेगी।’’ इसके साथ ही जहां सभी पक्षों की ओर से जोर-शोर से चुनावी दौरे किए जा रहे हैं, वहीं आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी जारी है। विशेष रूप से भाजपा और सपा एक-दूसरे पर शब्दों के खूब बाण छोड़ रहे हैं। 

योगी आदित्यनाथ का कहना है कि ‘‘अखिलेश यादव की रैलियों में भीड़ नहीं बल्कि मजमा लगता है। किसी चौराहे पर मजमा लगता है तो वहां भी भीड़ जुटती है। बाजार में भी भीड़ जुटती है।’’ एक अन्य सभा में योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘सपा सरकार के समय में देश के अंदर एक नारा चला था-जिस गाड़ी में सपा का झंडा, समझो उसके अंदर बैठा जाना-पहचाना गुंडा।’’ 

उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा है कि ‘‘2017 से पहले उत्तर प्रदेश में ‘लुंगी छाप’ और ‘जालीदार टोपी’ पहने गुंडे ही घूमते थे। इन गुंडा-माफियाओं को यदि सपा से निकाल दिया जाए तो इसमें कुछ भी नहीं बचेगा।’’ उन्होंने कांग्रेस के बारे में भी कहा,‘‘यही हाल कांग्रेस का भी है। कांग्रेस से यदि भ्रष्टाचारियों को बाहर कर दें तो इसमें भी कुछ नहीं बचेगा।’’

उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने भी कहा है कि ‘‘अखिलेश यादव मौसमी बीमारी से ग्रस्त हैं और मौसमी हिन्दू हैं। मंदिर जाने वालों पर सपा सरकार ने गोलियां चलवाई थीं। अखिलेश यादव की सरकार के काम मुगल हमलावरों गजनी और गौरी से कम नहीं हैं।’’ भाजपा की आलोचना करने में अखिलेश यादव भी पीछे नहीं हैं और वह तो एक बार भाजपा से भी आगे बढ़ कर 400 प्लस सीटों का नारा दे चुके हैं। लखीमपुर खीरी कांड के बारे में अखिलेश ने एक सभा में कहा, ‘‘अंग्रेजों ने जलियांवाला कांड में सामने से गोलियां चलाई थीं, भाजपा ने पीछे से किसानों पर जीप चढ़वा दी। भाजपा के राज में सब कुछ बर्बाद हुआ है।’’ 

‘‘संडीला शहर के प्रसिद्ध लड्डुओं का कारोबार बंद हो गया है। लोग रोजगार को तरस रहे हैं और बदलाव चाहते हैं। एक रंग वाले देश में कैसे खुशहाली लाएंगे। सपा ने सब रंग जोड़ कर गुलदस्ता बनाया है। लाल-पीला झंडा देख कर दिल्ली और लखनऊ वाले लाल-पीले हो रहे हैं।’’ 

समाजवादी विजय रथ यात्रा के पांचवें चरण में अखिलेश यादव ने हाल ही में सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में 3 दिनों में 4 चुनावी सभाएं कीं और झांसी के रोड शो में भी भीड़ जुटा कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया तथा बुंदेलखंड दौरे के दौरान उनके निशाने पर सिर्फ भाजपा ही रही व अपनी रैलियों के जरिए उन्होंने विरोधी दलों के बीच अकेले खड़े होने का संदेश भी दिया।

अखिलेश यादव ने अपनी चुनाव सभाओं में कहा कि जिस प्रकार बंगाल में ममता बनर्जी ने भाजपा को हार का मुंह दिखाया है उसी प्रकार उत्तर प्रदेश में यह काम समाजवादी पार्टी करेगी। उनके इस दौरे की एक विशेषता यह भी रही कि उन्होंने न तो कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पर निशाना साधा और न ही बसपा सुप्रीमो मायावती पर कोई कटाक्ष किया तथा कहा कि ‘‘उत्तर प्रदेश को योगी सरकार नहीं योग्य सरकार चाहिए।’’ अपनी चुनावी सभाओं में अखिलेश यादव निजी आक्षेप करने से भी नहीं चूक रहे। उन्होंने 3 दिसम्बर को झांसी में कहा, ‘‘जिन लोगों का परिवार ही नहीं है वे किसी के परिवार का दर्द क्या समझेंगे।’’ 

अखिलेश यादव के इस तरह के बयानों को लेकर कटाक्ष करते हुए राजनीतिक क्षेत्रों में कहा जा रहा है कि ‘‘भैया आपकी रैलियों में भीड़ तो बहुत है परंतु देखो वोट कितने पाते हो।’’ दूसरी ओर बसपा सुप्रीमो मायावती ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश के चुनावों में उनकी पार्टी 2022 में पूर्ण बहुमत से 2007 से भी अधिक मजबूत सरकार बनाएगी जब उन्होंने 206 सीटें जीती थीं। इन दिनों सोशल मीडिया पर एक सर्वे भी वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया है कि मुख्यमंत्री पद के लिए मायावती 42 फीसदी लोगों की पसंदीदा उम्मीदवार हैं। 

इसी बीच मायावती प्रदेश में अपनी मांगों को लेकर लम्बे समय से प्रदर्शन कर रहे 69000 अध्यापक भर्ती के उम्मीदवारों के पक्ष में भी उतर आई हैं तथा उन्होंने 4 दिसम्बर को उन परलाठी चार्ज की निंदा की है। बेशक योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में विकास के अनेक काम किए हैं, परंतु उनके सामने बेरोजगारी और प्रदेश में बढ़े हुए अपराधों की समस्या बड़ी चुनौती पेश कर रही है। कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश का चुनावी दंगल दिन-प्रतिदिन सख्त होता जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह चुनावी दंगल क्या रूप धारण करता है।—विजय कुमार 


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