सुप्रीमकोर्ट में 9 जजों की नियुक्ति एक ऐतिहासिक कदम

2021-09-01T03:28:51.537

देश की अदालतों में नीचे से ऊपर तक जजों और अन्य स्टाफ की कमी के कारण करोड़ों की संख्या में केस लम्बित पड़े हैं। कुछ मामलों में आवेदन करने वाले न्याय की प्रतीक्षा में संसार से ही विदा हो जाते हैं। इस वर्ष के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार देश की सुप्रीमकोर्ट में जजों की संख्या 24 थी और 10 जजों के स्थान खाली थे। देश की 25 हाईकोर्टों में जजों के कुल स्वीकृत 1098 पदों में से 455 स्थान रिक्त हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में सर्वाधिक 66, कलकत्ता हाईकोर्ट में 41 और पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट में जजों के 39 पद खाली पड़े हैं। यही हाल निचली अदालतों का भी है जहां 669 अदालतों में कोई जज ही नहीं है। सर्वाधिक बुरा हाल मध्य प्रदेश का है जहां 186 अदालतें जजों से खाली पड़ी हैं और बिहार में 165 निचली अदालतों में कोई जज नहीं है।

सुप्रीमकोर्ट में जजों के रिक्त स्थानों को भरने की दिशा में एक अभूतपूर्व पग उठाते हुए 31 अगस्त को पहली बार सुप्रीमकोर्ट के सभागार में आयोजित समारोह में मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना ने 3 महिला जजों सहित 9 नए जजों को एक साथ शपथ दिलाई। इन नियुक्तियों से सुप्रीमकोर्ट के जजों की संख्या बढ़ कर 33 हो गई है और अब मात्र एक जज की कमी रह गई है। एक खबर के अनुसार देश को सितम्बर 2027 में जस्टिस बी.वी. नागरतना के रूप में पहली महिला चीफ जस्टिस भी मिलने वाली हैं। 

इन नियुक्तियों से सुप्रीमकोर्ट में नए जजों की नियुक्ति को लेकर 21 महीने से चला आ रहा गतिरोध समाप्त हो जाने से शीर्ष अदालत के कामकाज में तेजी आएगी। इसी प्रकार देश की हाईकोर्टों और निचली अदालतों में भी जजों के रिक्त पड़े स्थानों को जल्द भरना चाहिए ताकि उनमें कामकाज सुचारू ढंग से हो सके और लोगों को जल्दी न्याय मिले।—विजय कुमार


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Content Writer

Pardeep

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