‘भ्रष्टाचार से वर्दी को दागदार करते’ पुलिस के चंद अधिकारी!
punjabkesari.in Friday, Mar 13, 2026 - 05:08 AM (IST)
देश में पुलिस को कानून व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। आम नागरिक को पुलिस से न्याय की उम्मीद होती है लेकिन अब पुलिस विभाग में शामिल चंद भ्रष्ट कर्मचारियों के कारनामों के कारण आम जनता की पुलिस से न्याय की यह उम्मीद धुंधली पड़ रही है।
दुर्भाग्य की बात यह है कि देश के सभी राज्यों की पुलिस में भ्रष्टाचार के मामले बढ़ रहे हैं। पिछले एक महीने में पुलिस कर्मचारियों और अधिकारियों द्वारा रिश्वत लेने के सामने आए मामले निम्न में दर्ज हैं :
* 10 फरवरी, 2026 को सी.बी.आई. ने दिल्ली पुलिस के पश्चिम विहार थाने में तैनात एक असिस्टैंट सब-इंस्पैक्टर को 15,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। आरोपी ने शिकायतकत्र्ता के भाई को जमानत दिलाने में मदद करने के बदले 25,000 रुपए की रिश्वत मांगी थी।
* 10 फरवरी को ही राजस्थान में कोटा इंटैलीजैंस इकाई ने गुमानपुरा थाना के एक कांस्टेबल को 3000 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी कांस्टेबल ‘जीत राम’ ने एक युवक को झूठे मुकद्दमे में नहीं फंसाने के बदले रिश्वत की मांग की थी।
* 10 फरवरी को ही तेलंगाना भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने माधापुर पुलिस स्टेशन के एक सब-इंस्पैक्टर ‘गांद्रो विनय’ को सरकारी लाभ पहुंचाने के बदले में कथित तौर पर 50,000 रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा।
* 11 फरवरी को सी.बी.आई. ने दिल्ली के सी.आर. पार्क पुलिस थाने में तैनात एक सहायक उप-निरीक्षक (ए.एस.आई.) को प्रॉपर्टी विवाद को निपटाने के लिए 10 लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी ए.एस.आई. प्रापर्टी से जुड़े एक मामले में शिकायतकत्र्ता के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करने के बदले में 25 लाख रुपए की रिश्वत मांग रहा था।
* 19 फरवरी को मुंबई में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ए.सी.बी.) ने कुरार पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक ‘संजीव तावड़े’ और उप-निरीक्षक ‘ज्ञानेश्वर जुत्रे’ को एक वकील से 1 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। शिकायतकत्र्ता के अनुसार उसके खिलाफ वित्तीय धोखाधड़ी और यौन शोषण के मामलों में कार्रवाई न करने के लिए उक्त अधिकारियों ने 3 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी, जिसमें से 2 लाख पहले ही ले लिए गए थे और शेष 1 लाख लेते समय ए.सी.बी. ने ट्रैप लगाकर उन्हें पकड़ लिया।
* 26 फरवरी को छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की पोड़ी चौकी में तैनात सब-इंस्पैक्टर अब्दुल मुनाफ और ए.एस.आई. ‘गुरु प्रसाद यादव’ को एंटी-क्रप्शन ब्यूरो ने किसान ‘सत्येंद्र कुमार प्रजापति’ से एक मामले में कार्रवाई को कमजोर करने के लिए 50,000 रुपए की रिश्वत मांगने के बाद ली गई 25,000 रुपए की पहली किस्त सहित रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
* 8 मार्च को पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने जालंधर के पुलिस डिवीजन नंबर 2 में तैनात ए.एस.आई. गोपाल सिंह को गांधी कैम्प के एक व्यक्ति से 8000 रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। यह रिश्वत शिकायतकत्र्ता को एक मामले में न फंसाने के बदले में ली गई थी
* 9 मार्च को जम्मू और कश्मीर भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (ए.सी.बी.) ने हैड कांस्टेबल ‘परवेज अहमद भाटी’ को तलवारा पुलिस चौकी में एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज एक मामले में जांच में हेरफेर करने और कानून की कुछ धाराओं को हटाने के बदले में शिकायतकत्र्ता से 5000 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
* और अब 10 मार्च को लोकायुक्त इंदौर ने अंजड़ थाना में तैनात एक उपनिरीक्षक और आरक्षक के खिलाफ एक ज्वैलर्स संचालक से केस में राहत देने के नाम पर रिश्वत मांगने के आरोप में मामला दर्ज किया।
पुलिस कर्मचारियों द्वारा रिश्वत मांगने से संबंधित इन मामलों में कांस्टेबल से लेकर इंस्पैक्टर स्तर तक के अधिकारी शामिल पाए गए हैं। ऐसे मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए निपटारा कर के आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जरूरत है ताकि पुलिस में शामिल चंद भ्रष्ट कर्मियों के कारनामों के कारण पूरा पुलिस विभाग बदनाम न हो और आम नागरिकों का पुलिस के प्रति भरोसा बहाल हो सके।—विजय कुमार
