‘यह है भारत देश हमारा’

किसी समय हमारी प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और उच्च संस्कारों के चलते  समस्त विश्व मार्गदर्शन के लिए भारतीय गुरुओं की शरण में आने में गर्व अनुभव करता था परंतु आज हम अपने उच्च संस्कारों, मान्यताओं व मर्यादाओं से किस कदर दूर हो गए हैं, यह मात्र एक महीने की निम्र ताजा घटनाओं से स्पष्टï है : 

15 अप्रैल को बुलंदशहर में एक किशोरी से उसके रिश्ते के भाई व दोस्त ने रिवाल्वर की नोक पर रातभर दरिंदगी की जिससे वह कोमा में चली गई और 11 मई को कोमा से बाहर आने पर उसने अपनी आपबीती लिख कर बताई। 13 मई को धरियाबाद में एक व्यक्ति ने जंगल में ले जाकर अपनी बेटी के गले पर तलवार रख कर उससे बलात्कार किया। 14 मई को जगराओं के निकटवर्ती गांव में एक युवक ने अपनी चचेरी बहन को घर छोडऩे के बहाने खेत में ले जाकर उसकी इज्जत लूट ली।

15 मई को जम्मू के कंगरैल भलवाल गांव में एक महिला ने अपने पति पर अपनी 6 वर्षीय बेटी की हत्या का आरोप लगाया। 15 मई को बरोटीवाला के निकट मढ़ावाला गांव में आसिफ नामक व्यक्ति ने अपनी 18 और 17 वर्षीय 2 सौतेली बेटियों को चाकू से गोद कर मार डाला। बताया जाता है कि कुछ दिन पहले आसिफ ने अपनी छोटी बेटी से छेड़छाड़ की थी जिससे घर में लड़ाई का माहौल था। 15 मई को लुधियाना में एक व्यक्ति ने बहू से बलात्कार किया। 16 मई को नई दिल्ली में एक व्यक्ति को अपने सौतेले पिता की हत्या के आरोप में पकड़ा गया। उसे संदेह था कि उसका पिता उसकी छोटी बहन पर बुरी नजर रखता था। 

16 मई को मध्य प्रदेश के सेमरी घाट में एक व्यक्ति ने पारिवारिक विवाद के चलते कुल्हाड़ी मार कर अपनी पत्नी और बूढ़ेे माता-पिता को मार डाला। 17 मई को बिहार में वैशाली के बेदोली गांव में किसी बात पर नाराज होकर अनिल राय नामक युवक ने अपने पिता को पीट-पीट कर मार दिया। ये घटनाएं हमें सचेत करती हैं कि अपने प्राचीन उच्च आदर्शों को भूल हम किस कदर नैतिक पतन के गत्र्त में गिरते जा रहे हैं।—विजय कुमार 

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