मासूमों को नहीं मिली बस्तों के बोझ से मुक्ति

रतिया(ललित):स्कूलों में पहली से दसवीं कक्षा के छात्रों के लिए स्कूल बैग की वेट कैटेगरी नए सिरे से निर्धारित कर तो दी गई है और आदेश भी जारी कर दिए गए। स्कूलों को लगे लगभग 40 दिन हो गए हैं पर बच्चों को भारी भरकम स्कूल बैग से अभी छुटकारा नहीं मिला। पहली से दूसरी कक्षा के बच्चे के बस्ते का भार डेढ़ किलो से अधिक नहीं हो सकता। वहीं दसवीं कक्षा के विद्यार्थी का बस्ता 5 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए। मगर फिलहाल स्थिति उलट है।

जिलेभर के अधिकतर मासूम बच्चे बस्तों के बोझ तले दबे हुए हैं। जिस ओर न स्कूल प्रबंधन का और न ही शिक्षा विभाग का ध्यान है। देखा जाए तो शिक्षा विभाग आदेश पर आदेश जारी करता रहता है लेकिन आदेशों की कितनी पालना की जाती है यह देखने का समय शिक्षा विभाग के पास नहीं है। राज्य सरकार से लेकर केंद्र स्तर से स्कूल बैग के भार से संबंधित दिशा-निर्देश जारी होते रहते हैं। तीसरी से पांचवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए भाषा, गणित व ई.वी.एस. के अलावा अन्य विषय अनिवार्य नहीं किया जाएगा।

अकसर देखा जाता है कि अधिकतर स्कूल तो मुख्य विषयों के साथ ही अन्य गतिविधियों के लिए भी बच्चों के स्कूली बैग पर अतिरिक्त बोझ बनाए हुए हैं। समय दर समय होने वाले कई शोध व सर्वे भी यह साबित कर चुके हैं कि भारी स्कूली बस्तों के कारण मासूमों के कंधे झुक रहे हैं। वहीं कमर व रीढ़ की हड्डी से संबंधित रोग होने का भी खतरा रहता है। इससे बचने के लिए प्रदेश शिक्षा विभाग ने संज्ञान तो लिया था मगर देखने वाली बात यह है कि इन निर्देशों का पालन कितनी गंभीरता से हो पाता है।

क्योंकि नए सत्र शुरू होते ही बच्चो के बैग फिर भर गए है लेकिन इन भारी भरकम बैग से छुटकारा दिलाने वाला कोई आदेश न स्कूलों ने न ही शिक्षा विभाग ने जारी किया है। वहीं शहीद भगत सिंह नौजवान सभा के प्रधान निर्भय सिंह का कहना है कि शिक्षा विभाग केवल औपचारिकताएं ही करता है। विभाग अपने ही निकाले आदेशों को थोड़े समय में ही भूल जाता है। निर्भय ने बताया कि कुछ समय पहले ऐसा ही आदेश जारी हुआ था कि किसी भी सरकारी या निजी स्कूल में व आसपास फास्ट फूड नहीं बिकेगा परंतु इस आदेश पर भी आज तक कोई अमल नहीं हुआ है।

शिक्षा विभाग की ओर से स्कूली बच्चों के बस्तों का भार निर्धारित किया गया था। जिसे सभी स्कूलों को पालन करना था। स्कूलों में केवल जरूरी किताबें ही मंगवाए जाने के आदेश थे। पहली व दूसरी कक्षा के बच्चों को होमवर्क  भी नहीं दिया जाने के आदेश थे। अब समय ही बताएगा कि इस आदेश पर कोई अमल होगा या बच्चे यूं ही बोझ ढोते रहेंगे।

Related Stories:

RELATED MP में कर्ज के बोझ तले एक और किसान ने दी जान