NCERT की किताब में शामिल होगी अटल बिहारी वाजपेयी की ये कविता

नई दिल्ली :  नेशनल काउंसलिंग ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की  कविता 8वीं कक्षा की किताब में शामिल की है। उनके योगदान और उपलब्धियों सदा के लिए अमर बनाने के लिए ऐसा किया गया है। बता दें कि वाजपेयी की कविता "कदम मिलाकार चलना होगा "कक्षा 8वीं की हिंदी की पाठ्यपुस्तक, वसंत का हिस्सा है, जिसमें रामधारी दिनेकर, हजारी प्रसाद द्विवेदी, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला', हरिशंकर परसाई और इस्मत चुगताई जैसे प्रसिद्ध लेखकों के द्वारा लिखे गए निबंध, कविता और लघु कथाएं शामिल हैं।

बता दें, वाजपेयी की लिखी हुई कविता  "कदम मिलाकार चलना होगा", एक बेहतर कल के लिए, कठिनाइयों के बावजूद, देशवासियों से एक साथ चलने की अपील करती है। बता दें, अभी तक ये नहीं बताया गया कि पाठ्यपुस्तक में वाजपेयी की कविता कब छपेगी।  इंडियन एक्सप्रैस की रिपोर्ट के अनुसार हृषिकेश सेनापति ने अभी इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया है।

बता दें, अटल बिहारी वाजपेयी का निधन पिछले साल 16 अगस्त को हुआ था. वहीं इस प्रयास में, एचआरडी मंत्रालय ने एनसीईआरटी को अपने प्रधानमंत्री के वर्षों से जुड़ी उपलब्धियों को शामिल करने के लिए कहा था। तब तक, वाजपेयी का उल्लेख केवल आजादी के बाद से भारत में दसवीं कक्षा की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक, राजनीति में किया गया था। लेकिन अब जल्द ही बच्चों को वाजपेयी की लिखी कविता पढ़ने का मौका मिला। आपको बता दें, साल 2017 में पाठ्यपुस्तक में एनसीईआरटी ने 1,334 बदलाव किए थे जिसमें 182 पुस्तकों में सुधार किया गया था।

 अटल बिहारी की लिखी कविता:- "कदम मिलाकर चलना होगा"

बाधाएं आती हैं आएं

घिरें प्रलय की घोर घटाएं,

पावों के नीचे अंगारे,

सिर पर बरसें यदि ज्वालाएं,

निज हाथों में हंसते-हंसते,

आग लगाकर जलना होगा.

कदम मिलाकर चलना होगा.

हास्य-रूदन में, तूफानों में,

अगर असंख्यक बलिदानों में,

उद्यानों में, वीरानों में,

अपमानों में, सम्मानों में,

उन्नत मस्तक, उभरा सीना,

पीड़ाओं में पलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा.

उजियारे में, अंधकार में,

कल कहार में, बीच धार में,

घोर घृणा में, पूत प्यार में,

क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,

जीवन के शत-शत आकर्षक,

अरमानों को ढलना होगा।

कदम मिलाकर चलना होगा।

सम्मुख फैला अगर ध्येय पथ,

प्रगति चिरंतन कैसा इति अब,

सुस्मित हर्षित कैसा श्रम श्लथ,

असफल, सफल समान मनोरथ,

सब कुछ देकर कुछ न मांगते,

पावस बनकर ढलना होगा.

कदम मिलाकर चलना होगा.

कुछ कांटों से सज्जित जीवन,

प्रखर प्यार से वंचित यौवन,

नीरवता से मुखरित मधुबन,

परहित अर्पित अपना तन-मन,

जीवन को शत-शत आहुति में,

जलना होगा, गलना होगा.

कदम मिलाकर चलना होगा

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