पुलवामा हमला: कलाइयों में बंधी घडिय़ां और जेब में रखे पर्स से हुई जवानों की पहचान

नई दिल्ली: कश्मीर के पुलवाला में सीआरपीएफ के काफिले पर दिल दहला देने वाले हुए आत्मघाती हमले के बाद जवानों से शव बुरी तरह से क्षत-विक्षत हो गए थे इसलिए उनकी शिनाख्त करना मुश्किल काम था। इसलिए सीआरपीएफ के सभी 40 जवानों की पहचान उनके आधार कार्ड, आईडी कार्ड तथा कलाइयों में बंधी घडिय़ों के जरिए ही हो पाई है। 



हमले के तुरंत बाद आई तस्वीरें इसकी गवाही भी दे रही थी। कहीं हाथ पड़ा हुआ था तो कहीं शरीर का दूसरा भाग बिखरा हुआ था। जवानों के बैग कहीं और थे तो उनकी टोपियां कहीं और बिखरी हुई थी।  वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि कुछ शवों की शिनाख्त कलाइयों में बंधी घडिय़ों अथवा उनके पर्स से हुई। ये सामान उनके सहयोगी ने पहचाने थे। 



 धमाके की आवाज से दहला पूरा इलाका
 धमाके की आवाज से पूरा इलाका दहल गया। सेना के जवाबी हमले पर आतंकी वहां से भाग निकले। इसके उपरांत जवानों ने पूरे इलाके को घेरते हुए कार बम विस्फोट से तबाह हुई बस में पड़े जख्मी और मृत जवानों को बाहर निकलवा कर अस्पताल पहुंचाना शुरू कर दिया। स्थिति इतनी भयावह थी कि धमाके की चपेट में आई बस में सवार कई जवान, जिनकी मौत हुई है, के शव सड़क पर गिरे पड़े थे व कई लाशों के चीथड़े तक उड़ गए थे।
 

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