राफेल डील: फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति का खुलासा, भारत सरकार ने दिया था रिलायंस का नाम

नई दिल्ली:फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने राफेल डील पर सनसनीखेज खुलासा किया है। फ्रांस्वा ओलांद ने कहा है कि राफेल सौदे के लिए भारत सरकार ने अनिल अंबानी की रिलायंस का नाम प्रस्तावित किया था और दसॉल्ट एविएशन कंपनी के पास दूसरा विकल्प नहीं था। 

 

Report referring to Former French President Hollande's statement that GOI insisted upon a particular firm as offset partner for Dassault Aviation in Rafale is being verified. It's reiterated that neither GoI nor French Govt had any say in the commercial decision: Def Spokesperson

— ANI (@ANI) September 21, 2018

 

ओलांद ने कहा कि भारत सरकार ने जिस सर्विस ग्रुप का नाम दिया, उससे दसॉल्ट ने बातचीत की। दसॉल्ट ने अनिल अंबानी से संपर्क किया। हमारे पास कोई विकल्प नहीं था। हमें जो वार्ताकार दिया गया, हमने स्वीकार किया। पूर्व राष्ट्रपति ओलांद की यह बात सरकार के दावे को खारिज करती है, जिसमें कहा गया था कि दसॉल्ट और रिलायंस के बीच समझौता एक कर्मशियल पैक्ट था जो दो निजी कंपनी के बीच हुआ। 

इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने इस आर्टिकल को रिट्वीट करते हुए ओलांद से कहा कि कृपया आप हमें यह भी बताएं कि राफेल की 2012 में 590 करोड़ की कीमत 2015 में 1690 करोड़ कैसे हो गई। मुझे पता है कि यूरो की वजह से यह कैलकुलेशन की दिक्कत नहीं है।' 

ओलांद के बयान की सच्चाई का पता लगा रही है सरकार

सरकार ने शुक्रवार को कहा कि फ्रांस के साथ लड़ाकू विमान राफेल के सौदे से संबंधित ऑफसेट समझौते में उसने किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं किया है और उस रिपोर्ट की सच्चाई का पता लगाया जा रहा है जिसमें फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसुआ ओलांद के हवाले से यह कहा गया है कि भारतीय भागीदार कंपनी का नाम भारत सरकार की ओर से दिया गया था। सौदे को लेकर विपक्ष द्वारा बार-बार कठघरे में खड़ी की जा रही मोदी सरकार को ओलांद के बयान के बाद फिर असहज स्थिति का सामना करना पड़ा। 

फ्रांस की एक वेबसाइट ‘मीडियापार्ट’ में प्रकाशित साक्षात्कार में ओलांद का हवाला देते हुए कहा गया है कि राफेल सौदे के लिए भारत की तरफ से ही रिलायंस के नाम का प्रस्ताव किया गया था और विमान निर्माता कंपनी डिसॉल्ट एविएशन के पास रिलायंस के अलावा कोई विकल्प नहीं था। रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा कि उस रिपोर्ट की सच्चाई का पता लगाया जा रहा है जिसमें श्री ओलांद के हवाले से कहा गया है कि भारत सरकार ने डसाल्ट एविएशन के साथ ऑफसेट साझेदारी के लिए केवल एक ही विशेष कंपनी के नाम का प्रस्ताव किया था। उन्होंने दोहराया कि न तो भारत सरकार और न ही फ्रांसीसी सरकार की ऑफसेट समझौते में कोई भूमिका थी। 

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