‘गन कल्चर’ से मुक्त होना ही होगा

घातक या साधारण कोई भी हथियार हिंसा के प्रतीक होते हैं। अति सर्वश्रेष्ठता की विकृत मानसिकता को जन्म देने वाले होते हैं। ङ्क्षहसा की आग में निर्दोष जिंदगियों को जला कर राख करने वाले होते हैं। यही कारण है कि अति गंभीर हथियार रखने वाले देश, समूह और व्यक्ति लुटेरी मानसिकताओं को अंजाम देकर निर्दोष और कमजोर पर तरह-तरह के अत्याचार, उत्पीडऩ करते हैं। हथियार को सिर्फ  सुरक्षा का प्रतीक नहीं माना जाना चाहिए, हथियार को हिंसा और अपराध का प्रतीक माना जाना चाहिए। वैध और अवैध सभी प्रकार के हथियारों के प्रति अब नजरिया बदलना चाहिए ताकि ब्रैन्टन टैरेन्ट जैसी हिंसक और बर्बर घटना से बचा जा सके। 

दुनिया ने अभी हाल ही में गन कल्चर के हिंसक दुष्परिणाम को देखा है। न्यूजीलैंड में एक व्यक्ति ने मस्जिद में हमला करके 50 से अधिक लोगों को मौत का शिकार बना डाला। दुनिया के अधिकतर लोग यह मानते हैं कि वह व्यक्ति जिसने बंदूक से इतने लोगों को सरेआम मौत का शिकार बना डाला था,  इस्लाम के अनुदार और हिंसक प्रवृत्तियों के खिलाफ गुस्से में था। इसके साथ ही साथ उस व्यक्ति को मानसिक तौर पर विक्षिप्त बताने की भी प्रक्रिया चल रही है। यह सही है कि मजहब आधारित सोच रखने वाले सभी शख्स किसी न किसी रूप में मानसिक विकृति के शिकार होते हैं और उनकी मानसिकताएं मानवता को लहूलुहान करती हैं। 

दुनिया में जितने भी मजहबी समूह हैं, दुनिया में जितने भी मजहबी सोच से पीड़ित आतंकवादी संगठन हैं वे सभी मजहब आधारित विकृति से बाहर कुछ देख या सोच ही नहीं सकते हैं। अलकायदा, तालिबान, आई.एस. जैसे मजहबी संगठन भी इसी प्रकार की विकृति के शिकार हैं। सूचना क्रांति के विस्फोट भी ऐसी विक्षिप्त और विकृति की मानसिकताओं को तोड़ नहीं सके हैं। पर दुनिया असली समस्याओं और संकटों के प्रति सोच चाकचौबंद ढंग से रखती ही नहीं है। 

सही सोच यह है कि मजहबी तौर पर विक्षिप्त लोगों और संगठनों के पास आसानी से ङ्क्षहसक हथियार कैसे पहुंच जाते हैं, मजहबी तौर पर विकृत लोगों को हथियार देने वाले लोग कौन हैं, किस मकसद से इन्हें हथियारयुक्त किया जाता है? ब्रैन्टन टैरेन्ट का उदाहरण देख लीजिए। ब्रैन्टन टैरेन्ट के पास अगर आधुनिक हथियार उपलब्ध नहीं होते तो फिर वह इतनी आसानी से न तो न्यूजीलैंड की मस्जिद में हमला कर सकता था और न ही 50 से अधिक लोगों को मौत का शिकार बना सकता था। ब्रैन्टन टैरेन्ट ने आसानी से अति ङ्क्षहसक हथियार हासिल किए थे। 

पर्दा डालने की कोशिश
अमरीका और यूरोप में गन कल्चर लंबे समय से हसा बरपा रहा है, शांति में अशांति फैला रहा है। फिर अमरीका और यूरोप गन कल्चर में संशोधन या फिर गन कल्चर पर प्रहार करने के लिए आगे क्यों नहीं आ रहे हैं। गन कल्चर पर पर्दा डालने की बड़ी कोशिश हुई है। सिर्फ यह कहा जा रहा है कि ब्रैन्टन टैरेन्ट इस्लाम और मुस्लिम आतंकवादी संगठनों से घृणा करता था,  इसीलिए उसने ऐसी बर्बर और हिंसककरतूत हेतु कदम उठा लिए। यह सच है कि अमरीका और यूरोप आज किसी न किसी रूप से इस्लाम के आक्रामक प्रचार-प्रसार के कारण न केवल अंचभित हैं, बल्कि मुस्लिम आतंकवादी संगठनों द्वारा फैलाई जा रही हिंसा और घृणा से विचलित, पीड़ित और आक्रोशित भी हैं। 

अमरीका और यूरोप के वैसे युवा जो गैर मुस्लिम हैं अब किसी भी प्रकार से इस्लाम और मुस्लिम आतंकवादी संगठनों के प्रति सहानुभूति रखने के लिए तैयार नहीं हैं। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि मुस्लिम आबादी को बहुलतावाद का प्रतीक समझने के लिए तैयार हैं जबकि अमरीका और यूरोप का समाज बहुलतावाद पर आधारित है जहां सभी धर्मों और मजहब को बराबरी का अधिकार दिया जाता है, अपनी किस्मत बनाने के लिए समान अवसर दिया जाता है, मुस्लिम दुनिया की तरह यूरोप और अमरीका का समाज एकाकी समाज नहीं है जहां पर सिर्फ और सिर्फ  मजहबी तानाशाही पसरी होती है। मजहबी घृणा पसरी होती है और अन्य धर्मों को ङ्क्षहसा, आतंकवाद, घृणा का शिकार बना कर इस्लाम स्वीकार करने के लिए बाध्य किया जाता है। इधर अमरीका और यूरोप में अलकायदा, आई.एस. जैसे मुस्लिम आतंकवादी संगठनों ने एक पर एक आतंकवादी घटनाएं कर अमरीका और यूरोप के युवा वर्ग में आक्रोश पैदा किया है, जिसकी परिणति न्यूजीलैंड में ब्रैन्टन टैरेन्ट जैसे युवा की आक्रोशित हिंसा है। 

फिर भी अमरीका और यूरोप अपने गन कल्चर की असफलता और ङ्क्षहसा से पीछा नहीं छुड़ा सकते हैं। इसके अपराध से मुक्त नहीं हो सकते हैं। प्रश्न यह है कि अगर अमरीका और यूरोप शांति और सद्भाव शील समाज व्यवस्था में सक्रिय रहते हैं तो उन्हें फिर बन्दूक यानी अति ङ्क्षहसक हथियारों से इतना उग्र और प्रहारक प्रेम क्यों है। शांति और सद्भाव की कसौटी पर हिंसा की कोई जगह नहीं होती है। बन्दूक सहित अन्य प्रकार के सभी हथियार हिंसा के प्रतीक होते हैं। अति सर्वश्रेेष्ठता की विकृत मानसिकता उत्पन्न करते हैं। अमरीका और यूरोप की स्थिति यह है कि वहां पर साधारण ही नहीं, बल्कि असाधारण और अति हिंसक हथियार आसानी से उपलब्ध होते हैं, कहा तो यहां तक जाता है कि अमरीका और यूरोप के सभी नागरिकों के पास हथियार हैं। यानी कि इस निष्कर्ष को स्वीकार किया जा सकता है कि अमरीका और यूरोप का समाज अति हथियारयुक्त है और अपने आप को शांति का प्रतीक बताने वाले यूरोपीय और अमरीकी नागरिक हिंसक हथियार रखने में ही गर्व महसूस करते हैं। 

गन कल्चर का भूत
अमरीका में गन कल्चर और गन ङ्क्षहसा हर समय अस्तित्व में होती है। सिर्फ  युवाओं तक यह गन ङ्क्षहसा सवार नहीं होती है, बल्कि गन ङ्क्षहसा बुजुर्गों और बच्चों पर भी सवार होकर बोलती है। अमरीका में बच्चों द्वारा ङ्क्षहसा बरपाने की कोई एक या दो घटनाएं नहीं हुई हैं, बल्कि अनेकों ऐसी हिंसा की घटनाएं हुई  हैं जिसमें बच्चों ने अपने घर से घातक हथियार लाकर अपने स्कूली साथियों और स्कूल टीचरों को मौत के घाट उतार डाला है। युवाओं द्वारा किसी न किसी वाद या फिर किसी न किस समस्या से आक्रोशित होकर सार्वजनिक जगहों पर गोलीबारी करना, निर्दोष लोगों को मौत का शिकार बना देने की घटनाएं आम हैं। 

अमरीका में फेसबुक और ट्विटर जैसे चर्चित संस्थान भी गन हिंसा के शिकार हो चुके हैं, जहां पर आक्रोशित युवाओं ने गोलीबारी की घटना को अंजाम देकर हत्याएं की थीं। अमरीका और यूरोप में इस बात पर कम ही विचार होता है कि किसे हथियार की जरूरत है और किसे हथियार की जरूरत नहीं। अगर इस जरूरत को समझा जाता और यह तय किया जाता कि जिसे जान का खतरा है, जिसे अपने परिवार का खतरा है, जिसे अपनी संपत्ति का खतरा है उसे ही हथियार उपलब्ध कराया जाना चाहिए। 

हथियार मांगने वाला व्यक्ति कहीं विक्षिप्त या फिर विकृत मानसिकता का तो नहीं है, हथियार मांगने वाले का संबंध किसी न किसी प्रकार से आतंकवादी संगठन से तो नहीं है, हथियार मांगने वाले का संबंध किसी न किसी प्रकार से घृणा फैलाने वालों से तो नहीं है। हथियार मांगने वाले व्यक्ति का संबंध ऐसे मजहबी समूह से तो नहीं है जो विखंडनकारी, घृणाकारी और भेदभाव से उत्पन्न मानसिकता का पोषक है। अगर इस प्रकार की जांच होगी तो फिर ऐसे लोगों के पास सरकार प्रेषित हथियार उपलब्ध नहीं हो सकते हैं, ऐसी हिंसा और घृणा से बचा जा सकता है। 

ब्रैन्टन टैरेन्ट के उदाहरण को अति गंभीरता के साथ लिया जाना चाहिए। न्यूजीलैंड के राष्ट्रपति ने इस घटना को बड़ी गंभीरता प्रदान की है। उन्होंने न केवल अपनी विफलता मानी है, बल्कि कहा भी है कि उनके लिए गन कल्चर आत्मघाती साबित हो रहा है। न्यूजीलैंड के राष्ट्रपति ने अब गन कल्चर से पीछा छुड़ाने की बात भी कही है। न केवल  न्यूजीलैंड को बल्कि अमरीका और पूरे यूरोप को अब अपने गन कल्चर  से मुक्त होना ही होगा, हथियार देने वाले कानूनों में संशोधन करना ही होगा, अगर ऐसा नहीं हुआ तो ब्रैन्टन टैरेन्ट जैसी अनेकानेक घटनाएं अमरीका और यूरोप को आक्रांत एवं पीड़ित करती रहेंगी।-विष्णु गुप्त
 

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