यू.पी. की तर्ज पर अन्य राज्यों में भी अकेले चुनाव लड़ेगी Congress

जालंधर(रविंदर):उत्तर प्रदेश में बसपा व सपा गठबंधन से तिलमलाई कांग्रेस ने अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। इससे कांग्रेसी वर्करों में बेहद खुशी पाई जा रही है। कभी उत्तर प्रदेश में 10 से 15 सीटों पर लड़ने वाली कांग्रेस लंबे समय बाद उत्तर प्रदेश की सभी लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने के पार्टी ऐलान के बाद देश के अन्य राज्यों से भी यही मांग उठने लगी है। खासतौर पर पश्चिम बंगाल और पंजाब से। इन दोनों राज्य के नेता और खास तौर पर पंजाब के मुख्यमंत्री ही नहीं चाहते कि पार्टी इन राज्यों में किसी पार्टी के साथ गठबंधन करे। 

लंबे समय से गठबंधन की राजनीति पर निर्भर कांग्रेस
गौर हो कि कांग्रेस देश भर में पिछले लंबे समय से गठबंधन की राजनीति पर निर्भर रह चुकी है। यह गठबंधन की राजनीति का ही असर रहा कि जिन-जिन राज्यों में कांग्रेस ने गठबंधन किया, वहां की क्षेत्रीय पार्टियां मजबूत हो गईं और कांग्रेस को दूसरे या तीसरे नंबर की पार्टी बनकर सीटें शेयर करनी पड़ीं। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्य इसका एक उदाहरण हैं। उत्तर प्रदेश में हर बार कांग्रेस खुद न लड़कर सपा या बसपा पर निर्भर रहती है। वहीं, बिहार में पार्टी पूरी तरह से राष्ट्रीय जनता दल पर निर्भर है तो पश्चिम बंगाल में कभी वामपंथी दलों और कभी तृणमूल कांग्रेस पर निर्भर रहना पड़ रहा है। 

मोदी को हराने के लिए कांग्रेस लेना चाहती है गठबंधन का सहारा
कांग्रेस हाईकमान का मानना है कि केंद्र में मोदी का मुकाबला करने के लिए गठबंधन की राजनीति का सहारा लेना ही पड़ेगा, मगर उत्तर प्रदेश में सपा व बसपा गठबंधन ने कांग्रेस को तगड़ी चोट पहुंचाई है। हालांकि इससे पार्टी हाईकमान को निराशा जरूर हुई है। पर कांग्रेसी वर्करों में खासी खुशी पाई जा रही है। वर्करों का कहना है कि गठबंधन होने पर वह सपा या बसपा के लिए ही प्रचार करते थक जाते थे।  अब खुशी है कि प्रचार अपनी ही पार्टी के लिए करना पड़ेगा और ज्यादा से ज्यादा टिकटों पर कांग्रेसी वर्करों को खुद चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। 

पंजाब में खंगाला जा रहा है आप से गठबंधन की संभावनाओं को
पंजाब में कांग्रेस हाईकमान आम आदमी पार्टी से गठबंधन करने की इच्छुक है तो पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस पर डोरे डाले जा रहे हैं। मगर उत्तर प्रदेश के एपिसोड के बाद इन दोनों राज्यों से भी अकेले चुनाव लड़ने की मांग ही उठने लगी है। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह तो पहले ही राहुल गांधी को कह चुके हैं कि पंजाब में आम आदमी पार्टी का जोर खत्म हो चुका है और चुनाव अकेले ही लड़ने चाहिएं। वहीं, पश्चिम बंगाल के नेताओं ने तो यहां तक कहा है कि गठबंधन करने से कांग्रेस को फायदा नहीं, बल्कि तृणमूल कांग्रेस को फायदा मिलेगा। दूसरा गठबंधन होने की सूरत में यहां सीधा फायदा भाजपा को मिल सकता है। तीसरा पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का व्यवहार कभी भी कांग्रेस के प्रति लचीला नहीं रहा है। इन सब बातों के बाद कांग्रेस हाईकमान ने पश्चिम बंगाल में गठबंधन की बातों को अब स्लो प्रोसैस में डाल दिया है। वहीं, पंजाब में आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की संभावनाओं को दोबारा से खंगाला जा रहा है।

Related Stories:

RELATED प्रेमी ने की महिला की हत्या यू.पी. से भगाकर लाया था