अगर लुधियाना लोकसभा सीट भाजपा को मिली तो फूलका हो सकते हैं उम्मीदवार

जालंधर(बुलंद):आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर दिन-ब-दिन पंजाब की राजनीति में उबाल आता जा रहा है। इस समय सबसे ज्यादा घमासान लुधियाना सीट को लेकर अकाली दल और भाजपा में मचा हुआ है। राजनीतिक जानकारों की मानें तो लगातार 2 बार लुधियाना से अकाली दल के उम्मीदवार को मिली हार के बाद इस बार दोनों पार्टियों में लुधियाना और अमृतसर की सीटों की अदला-बदली को लेकर अंदरखाते चर्चा चल रही है। हो सकता है कि लोकसभा चुनावों में अमृतसर सीट अकाली दल और लुधियाना भाजपा को मिले। 

लोकसभा चुनावों को लेकर संशय में अकाली 

इस चर्चा के बीच अकाली दल की लुधियाना की समूची लीडरशिप संशय में फंसी हुई है कि आखिर वह लोकसभा चुनावों की तैयारी किस तरीके से करे। बेशक अकाली दल द्वारा अपने उम्मीदवारों का ऐलान नहीं किया गया, मगर लुधियाना सीट को लेकर अकाली दल और भाजपा दोनों पार्टियों के वर्करों को लेकर निराशा है। अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं है कि कौनसा नेता मैदान में होगा और किस पार्टी का होगा, जबकि चुनावों को महज 3 माह रह गए हैं।वहीं दूसरी ओर चर्चा यह है कि कांग्रेस पार्टी लुधियाना के मौजूदा सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा मैदान में उतार सकती है। इसी के चलते वह अपने संसदीय क्षेत्र में पूरी तरह से एक्टिव हैं और चुनावी प्लेटफार्म पूरी तरह से तैयार कर रहे हैं।


 
2009 से पहले लुधियाना सीट पर था अकाली दल का दबदबा

अकाली दल के टकसाली जानकार बताते हैं कि 2009 से पहले तक अकाली दल का लुधियाना संसदीय सीट पर पूरी तरह से दबदबा रहा है। चाहे यहां अकाली दल और कांग्रेस दोनों के उम्मीदवार बारी-बारी जीतते रहे हैं, परंतु पिछले 2 लोकसभा चुनावों 2009 व 2014 में इस सीट पर कांग्रेस ने कब्जा कर रखा है। लुधियाना सीट पर आखिरी बार 2004 में अकाली दल के उम्मीदवार शरणजीत सिंह ढिल्लों ने कांग्रेस के मुनीष तिवारी को तकरीबन 30,000 वोटों से हराया था। उसके बाद 2009 में लुधियाना संसदीय सीट में से ग्रामीण एरिया कम होकर शहरी वोट बैंक बढने से कांग्रेस को इसका लाभ मिला और मुनीष तिवारी 1 लाख वोटों से जीते। इसके बाद 2014 में बिट्टू ने इस सीट से चौकोणीय मुकाबले में जीत हासिल की। 

बिट्टू को फिर से मैदान की उतारने की तैयारी में कांग्रेस

कांग्रेसी सूत्रों की मानें तो एक बार फिर यहां से रवनीत बिट्टू को मैदान में उतारने की तैयारी हो चुकी है, परंतु वहीं दूसरी तरफ अकाली दल की ओर से पिछले लंबे समय से किसी भी एक नेता को इस संसदीय हलके में पक्के तौर पर पैर जमाने का मौका नहीं दिया गया। राजनीतिक इतिहासकारों की मानें तो पिछले 72 सालों में सिर्फ अकाली दल के नेता अमरीक सिंह आलीवाल एकमात्र ऐसे सांसद रहे हैं जिन्होंने लगातार 2 बार लुधियाना संसदीय सीट से चुनाव जीते हैं जबकि और कोई भी सांसद इस सीट से रिपीट नहीं हो सका। 

फूलका को लुधियाना सीट पर उतार सकती है भाजपा

अकाली दल और भाजपा दोनों के लुधियाना से वर्कर इस बात का पूरी तनदेही से इंतजार करने में लगे हैं कि आखिर अंतिम नतीजा क्या आता है और किसकी झोली में लुधियाना की संसदीय सीट पड़ती है। जानकारों की मानें तो अगर लुधियाना और अमृतसर की सीटों की अदला-बदली में शिअद-भाजपा गठबंधन किसी नतीजे पर नहीं पहुंचते तो शिरोमणि अकाली दल इस सीट से पूर्व मंत्री हीरा सिंह गाबडिया या महेशइन्द्रसिंह गरेवाल को उतार सकता है, परंतु अगर भाजपा को लुधियाना सीट से चुनाव लडने का मौका मिलता है तो बेहद नाटकीय ढंग से इस सीट से भाजपा आम आदमी के पूर्व नेता एडवोकेट एच.एस. फूलका को उतारने की तैयारी में है।

फूलका और भाजपा की बढ़ी नजदीकियां

भाजपा सूत्रों की मानें तो आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद बेशक फूलका ने ऐलान किया था कि वह अब न तो राजनीति में जाएंगे और न ही किसी भी पार्टी से चुनाव लड़ेंगे परंतु इसके बावजूद 1984 दिल्ली सिख विरोधी दंगों के केस जीतने के बाद फूलका ने बयान दिया था कि भाजपा ने इन सारे केसों में इनकी काफी मदद की है जो काफी प्रशंसनीय है। इसके बाद से ही फूलका की भाजपा से नजदीकियां बढने की खबरें सामने आती रही हैं। पार्टी के जानकार बताते हैं कि फूलका का भाजपा के उच्च स्तरीय नेताओं के साथ अंदरखाते संपर्क चल रहा है और यदि खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी फूलका से लुधियाना संसदीय सीट से चुनाव लडऩे को कहते हैं तो फूलका इंकार नहीं कर पाएंगे। यह भी हो सकता है कि फूलका सीधे तौर पर भाजपा के उम्मीदवार बनने की जगह अपनी कोई पार्टी बनाकर भाजपा के समर्थन से लुधियाना संसदीय सीट से चुनाव लड़ें। 

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