भगवान शंकर को खुश करने के लिए करें उनके इस अवतार की पूजा

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हिंदू धर्म के ग्रंथों के अनुसार भगवान शंकर के कई अवतार हैं, जिनका शास्त्रों में वर्णन भी किया गया है। उन्हीं में से एक है कालभैरव का अवतार। कहा जाता है कि कालभैरव भगवान शंकर की क्रोधाग्नि का विग्रह रूप माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार ये भगवान शंकर का पांचवा अवतार है। बता दें कि इमके भी दो रूप है, जिनमें से एक है बटुक भैरव  और दूसरा है भयंकर दंडनायक का है। कालभैरव का पहला रूप भक्तों को अभय देने वाला माना जाता है। तो वहीं दूसरा अपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाला माना जाता है। कहा जाता है कि जो भी इनकी पूजा-अर्चना करता है उसके परिवार पर किसी भी तरह की नकारात्मक ऊर्जा, जादू-टोने और भूत-प्रेत का असर नहीं होता। आइए जानते हैं इससे जुड़ी कुछ खास बातें-


बहुत कम लोग जानते होंगे कि देवी के 51 शक्तिपीठों में देवी मां के साथ-साथ कालभैरव भी विराजमान रहते हैं। मान्यता है कालभैरव अलग-अलग रूप लेकर इनकी मतलब देवी मां की रक्षा करते हैं। कहा जाता है जो भी भक्त किसी भी शक्तिपीठ के दर्शन करने के बाद बिना भैरव के दर्शन किए जाता है उसकी साधना कभी स्वीकार नहीं होती। वहीं जो इनके दर्शन करता है उसके जीवन से सभी तरह के कष्ट और भय दूर हो जाते हैं।

ज्योतिष शास्त्र में कालभैरल को शनि का अधिपति देव माना गया है। तो अगर कोई जातक शनि के दुष्प्रभाव से परेशान हो या फिर राहु-केतु के मिलन के कारण हो रही पीड़ा से जूझ रहा हो तो उसे कालभैरव की उपासान करनी चाहिए। इसके अलावा इन्हें खुश करने के लिए उड़द की दाल या इससे बना कोई मिष्ठान, दूध या मेवे का भोग लगाना चाहिए। इसके अलावा इन्हें चमेली का फूल चढ़ाया जा सकता है क्योंकि इन्हें ये अधिक प्रिय है।

इनकी कृपा पाने के लिए इनके नाम की 108 नाम का माला जप प्रतिदिन करें। कहा जाता है कि इस प्रभावी उपाय से जातक के सभी भय दूर हो जाते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान निकल जाता है।

इसके अलावा इन्हें प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन भैरव चालीसा का पाठ जरूर करना चाहिए। कहते हैं इसका पाठ करने से व्यक्ति को बड़े से बड़े कष्ट से मुक्ति मिल जाती है।
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