कुलभूषण जाधव केस: भारतीय मीडिया ने की पाक की मदद?

नेशनल डेस्क (मनीष शर्मा):संयुक्त राष्ट्र की अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को रिहा करने की याचिका पर चार दिवसीय सुनवाई चल रही है। कुलभूषण जाधव इस समय जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की जेल में बंद है। जाधव को 2017 में एक पाकिस्तानी अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। पाकिस्तान जहां जाधव को रॉ का एजेंट बता रहा है वहीं भारत पाकिस्तान के इस दावे को सिरे से खारिज करता आया है। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में भारत और पाकिस्तान दोनों को अपना पक्ष रखने के लिए एक-एक दिन का समय दिया गया। सोमवार को भारत की तरफ से हरीश साल्वे ने देश का पक्ष रखा। 



मंगलवार को भारत उस समय हैरान रह गया जब पाकिस्तान के काउंसलर खवार कुरैशी ने अपने पक्ष को मजबूत करने के लिए भारतीय पत्रकार करण थापर, चन्दन नंदी और प्रवीण स्वामी की मीडिया में छपी रिपोर्टों का हवाला दिया जिनमें बताया गया था कुलभूषण जाधव रॉ के एजेंट हैं और वह पाकिस्तान में जासूसी करते रहे हैं।  भारतीय पत्रकारों की वो कौन सी रिपोर्ट है जिसे पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में रख रहा है वो बाद में बताते हैं, पहले यह बताते हैं कि कुलभूषण जाधव को  लेकर भारत और पाकिस्तान का क्या स्टैंड है?

कुलभूषण जाधव पर पाकिस्तान का स्टैंड 

  • कुलभूषण जाधव भारतीय नौसेना के अधिकारी हैं।
  • ह भारत की रिसर्च एंड एनालिसिस विंग यानी रॉ के लिए जासूसी करते रहे ।
  • वह बलूचिस्तान में विध्वंसक गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
  • जाधव को बलोचिस्तान में गिरफ्तार किया गया।


भारत का स्टैंड

  • कुलभूषण जाधव भारतीय नागरिक और पूर्व नौसेना अधिकारी हैं।
  • वह रॉ एजेंट नहीं हैं।
  • जाधव का ईरान में अपना व्यापार है।
  • उनका ईरान में अपहरण किया गया।



अब आपको विस्तार से बताते हैं पाकिस्तान के काउंसलर खवार कुरैशी ने किन -किन मीडिया रिपोर्टों का हवाला दिया जिसने पाकिस्तान के स्टैंड को मजबूत  करने में मदद की। पाकिस्तानी पक्ष ने 2017 में द इंडियन एक्सप्रेस में पत्रकार करण थापर द्वारा लिखे गए एक लेख का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने जाधव के संबंध में विदेश मंत्रालय के रुख पर सवाल उठाया था। आपको दिखाते हैं करण थापर का वह  आर्टिकल जिसमें वह भारत के खिलाफ खड़े दिखाई देते हैं। आप भी जानिए आर्टिकल की  मुख्य बातें :

  1. 1. जाधव के पास दो पासपोर्ट क्यों हैं, एक उनके नाम पर और दूसरा हुसैन मुबारक पटेल के नाम पर?
  2. 2. अगर पाकिस्तान ने जाधव का अपहरण किया, तो क्या हमें यह पूछने की जरूरत नहीं है कि पाकिस्तान ने ऐसा क्यों किया ? क्या यह सवाल नहीं उठता कि उसके बारे में ऐसा क्या खास था कि उसका अपहरण किया गया ? आखिरकार, ईरान में 4,000 भारतीय हैं- और किसी का अपहरण नहीं किया गया है।
  3. 3. द इंडियन एक्सप्रेस और एशियन एज दोनों का मत है कि जाधव के पाकिस्तानी ड्रग बैरन उज़ैर बलूच के साथ संबंध थे और ड्रग माफिया द्वारा बदला लेने के जाल में फंस गया था?
  4. 4. द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार 2010 और 2012 के बीच, जाधव ने रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ ) में शामिल होने के लिए तीन अलग-अलग प्रयास किए थे । 



कुलभूषण जाधव पाकिस्तान में भारत के लिए जासूसी करते थे उसको साबित करने के लिए पाक काउंसलर ने फ्रंटलाइन के लिए जनवरी 2018 में प्रवीण स्वामी द्वारा लिखित एक अन्य लेख का हवाला दिया। India's Secret War नामक एक लेख में, स्वामी ने तर्क दिया था कि "भारत के लिए यह स्वीकार करना असंभव है कि जाधव कौन है? स्वामी ने दावा किया था कि जाधव वास्तव में पाकिस्तान में जासूसी मिशन पर थे। आईये देखते हैं प्रवीण स्वामी के आर्टिकल की मुख्य बातें :

  1. 1.  जाधव अभी भी भारतीय नौसेना के साथ काम करते हैं।
  2. 2. भारत बता  नहीं पाया है कि जाधव कब रिटायर हुआ ?
  3. 3. भारत साबित नहीं कर पाया है कि जाधव को हुसैन मुबारक पटेल का पासपोर्ट किस तरह मिला  4. पाकिस्तान के आईएसआई के पास भारत को शर्मिंदा करने के लिए पर्याप्त सामग्री है।



पाकिस्तानी काउंसलर ने भारत मीडिया के एक अन्य लेख, द क्विंट में प्रकाशित चंदन नंदी का एक लेख का भी ज़िक्र किया। नंदी ने आरोप लगाया था कि जाधव के पास दो पासपोर्ट हैं, एक उनके नाम पर और दूसरा हुसैन मुबारक पटेल नाम के साथ, और यह इस बात के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया था कि वह पाकिस्तान में रॉ के लिए काम कर रहे थे। लेकिन जब चारों तरफ से इस आर्टिकल का विरोध हुआ तो द क्विंट ने वह आर्टिकल हटा दिया।

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