इलेक्शन डायरीः आई.के. गुजराल ने भी पाकिस्तान में बंद किए थे रॉ के आप्रेशन

इलेक्शन डेस्क( नरेश कुमार): देश की सुरक्षा के मामले में सिर्फ मोरारजी देसाई से ही चूक नहीं हुई थी बल्कि इस फेहरिस्त में इंद्र कुमार गुजराल का नाम भी आता है। पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल शांति के पक्षधर थे और बतौर विदेश मंत्री उन्होंने कई देशों के साथ भारत के अच्छे संबंधों के लिए काम किया।


विदेशों के साथ संबंधों की भारत की उस दौर की नीति को आज भी ‘गुजराल सिद्धांत’ के तौर पर याद किया जाता है लेकिन अपनी इसी नीति के तहत आई.के. गुजराल ने प्रधानमंत्री बनते ही पाकिस्तान में काम कर रही भारतीय खुफिया एजैंसी रॉ (रिसर्च एंड एनालिसिस विंग) के आप्रेशन बंद करवा दिए थे।

इसका नतीजा यह हुआ कि भारत का पाकिस्तान के अंदर खुफिया तंत्र कमजोर हो गया और हमें कारगिल में पाकिस्तान द्वारा की गई घुसपैठ की जानकारी नहीं मिल सकी। हालांकि गुजराल ने अपनी किताब ‘मैटर ऑफ डिस्क्रिशन’ में अपने इस कदम का यह कहते हुए बचाव किया कि पाकिस्तान के साथ दोस्ताना संबंध उस समय भारत की जरूरत थी और भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंधों का पक्षधर था। लिहाजा उन्होंने पाकिस्तान में रॉ के आप्रेशन बंद करने के फैसले को उचित ठहराया था।

हालांकि इसका एक फायदा यह भी हुआ कि जब लाहौर में धमाके हुए तो पाकिस्तान इसका आरोप भारत पर नहीं मढ़ सका लेकिन इसके बाद भारत की खुफिया एजैंसी पाकिस्तान में किसी तरह का स्पैशल आप्रेशन नहीं चला पाई और न ही हमें पाकिस्तान की खुफिया जानकारियां मिल सकीं। सुरक्षा के कई जानकार कूटनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से इस फैसले को बड़ी चूक मानते हैं।              

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