Holi 2019ः इस होली जान लीजिए इन रंगों का महत्व

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रंगों का हमारे जीवन में बड़ा ही महत्व होता है। ऐसा माना जाता है कि सभी रंग सूर्य की किरणों के प्रभाव से बनते हैं। या यूं कहें कि सूर्य की किरणों में ही सभी रंगों का सम्मिश्रण है। जैसे सूर्य की किरणों में हर तरह की वनस्पतियां और जीवधारी पनपते-बढ़ते हैं। ठीक वैसे ही किरणों के प्रभाव से रंग बनते हैं। कहते हैं कि हरा, लाल और नीला रंग मनुष्य को स्वस्थ, यशस्वी और गौरवशाली बनाने वाला होता है। माना गया है कि रंगों के आकर्षक वातावरण में मन प्रसन्न रहता है और उदासी दूर होती है। कहते हैं कि होली में रगों के साथ खेलने से लोगों के बीच आपसी प्रेम बढ़ता है और एक-दूसरे के साथ रहने का संदेश मिलता है। होली एक ऐसा त्योहार है जो व्यक्ति को एक-दूसरे के पास ले आता है। आज हम आपको होली में होने वाले रंगों के बारे में बताएंगे कि हर एक रंग का कुछ अलग महत्व होता है।


लाल रंग
कहते हैं कि लाल रंग व्यक्ति के स्वास्थ्य और मन को प्रसन्न करता है। इसलिए हिंदू धर्म में लाल टीका लगाया जाता है। क्योंकि ये शौर्य एवं विजय का प्रतीक माना जाता है। आप सबने देखा होगा कि हर देवी-देवता की प्रतिमा पर लाल रंग का टीका किया जाता है, ऐसा इसलिए क्योंकि ये सभी देवी-देव परम मंगलकारी, धन, तेज, शौर्य और पराक्रम को प्रगट करते हैं। ये भी देखा जाता है कि जब कोई शुभ कार्य होता है तब भी लाल रंग को ही सबसे ज्यादा शुभ माना जाता है और लाल रंग धन, विपुल संपत्ति, समृद्धि और शुभ-लाभ को प्रकट करने वाला होता है। 

हरा रंग
यह रंग जितने भी पेड़-पौधे, खेतों-पर्वतीय प्रदेश को ढ़कने वाला मधुर रंग है। हरा रंग मन को शांति व शीतलता प्रदान करता है तो वहीं दूसरी ओर मनुष्य को सुख, शांति, स्फूर्ति देने वाला रंग है। ऋषि-मुनियों ने अपनी आध्यात्मिक उन्नति हरे-हरे पर्वत शिखरों, घास के मैदानों तक निर्झरों के हरे तटों के सुखद-शांत वातावरण में की थी। 

पीला रंग
यह रंग ज्ञान और विद्या का, सुख और शांति का, अध्ययन, विद्वता, योग्यता, एकाग्रता और मानसिक तथा बौद्धिक उन्नति का प्रतीक माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि ये रंग मस्तिष्क को प्रफुल्लित और उत्तेजित करता है। भगवान श्रीकृष्ण को भी पीताम्बर से सुसज्जित हैं। भगवान गणेश की धोती पीली और दुपट्टा नीला या हरा रखा गया है। विशेशकर होली में पीले रंग का अधिक महत्व होता है। 

नीला रंग
मनोविज्ञान के अनुसार नीला रंग बल, पौरूष और वीरभाव का प्रतीक है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्रजी और पुरुषोत्तम योगेश्वर श्रीकृष्ण भगवान दोनों ने ही संपूर्ण मानवता की रक्षा एवं दानवता के विरुद्ध युद्ध करने में आजीवन व्यतीत किया है और इनका वर्ण नीला है और इसके साथ ही भगवान शिव को ‍नीलकंठ कहा जाता है। सागर मंथन करने पर उसमें से निकले विष को पीकर उन्होंने सृष्टि का बचाव किया था। यह विष यदि पृथ्वी पर फेंका जाता तो सर्वनाश निश्चित था। 
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