हिमाचल की जेलों में बंद कैदियों को लेकर EC ने लिया ये बड़ा फैसला

शिमला: लोकसभा चुनाव सम्पन्न होने तक हिमाचल की जेलों में बंद कैदी पैरोल पर नहीं भेजे जाएंगे। खासकर नशीली दवाइयों के कारण जेलों में सजा काट रहे कैदियों के पैरोल पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाया गया है। भारत निर्वाचन आयोग (ई.सी.आई.) ने इसे लेकर हिमाचल के मुख्य सचिव बी.के. अग्रवाल को पत्र लिखा है। ई.सी.आई. ने हिदायत दी है कि यदि बहुत जरूरी (आपात जैसी स्थिति) हुआ तो ही कैदी को पैरोल पर भेजा जाए लेकिन इससे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त से अनुमति लेनी अनिवार्य होगी।

पैरोल पर भेजा तो पुलिस को हर वक्त रखनी होगी नजर

यदि सरकार किसी कैदी को चुनाव आचार संहिता के दौरान पैरोल पर भेजती है तो सरकार को यह सुनिश्चित बनाना होगा कि कैदी किसी भी तरह की चुनावी गतिविधियों में शामिल न हो। उस पर पुलिस को हर वक्त नजर रखनी होगी। इसी तरह नशीली दवाइयों के अपराधियों को पैरोल पर भेजने की सूरत में ड्रग लॉ एनफोर्समैंट एजैंसी एन.सी.बी. को सूचित करना होगा। चुनावी गतिविधियों में कैदी के शामिल होने पर ई.सी.आई. ने तुरंत उसका पैरोल खत्म करने के निर्देश दिए हैं।

हिमाचल की जेलों में 1,840 से ज्यादा कैदी

हिमाचल में कुल 14 जेले हैं। इनमें 2 मॉडल सैंट्रल जेलें, 2 डिस्ट्रिक्ट जेलें, 1 ओपन एयर जेल, 1 बोरस्टल जेल तथा 8 सब जेलें शामिल हंै। इन जेलों में 1,840 से ज्यादा कैदी विभिन्न अपराधों की सजा काट रहे हैं जिनमें 106 महिला अपराधी भी शामिल हैं।

जानें क्या होता है पैरोल

जेल में रहते हुए अच्छे चाल-चलन वाले कैदियों को कुछ दिनों के लिए पैरोल पर घर भेजने की व्यवस्था है। इन्हें जेल प्रशासन के आग्रह पर गृह विभाग की अनुमति के बाद कुछ दिनों के लिए छुट्टी पर भेजा जाता है लेकिन 19 मई को प्रदेश में होने जा रहे लोकसभा चुनाव के दृष्टिगत कैदियों के पैरोल पर रोक रहेगी। चुनाव आचार संहिता हटने के बाद ही कैदियों को पैरोल पर भेजा जा सकेगा।

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