Kundli Tv- इसलिए एकादशी में चावल खाना है वर्जित!

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हिंदू धर्म में एकादशी के व्रत का बहुत महत्व है। शिवरात्रि की ही तरह इस व्रत को भी बहुत पावन माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इस दिन को लेकर कुछ नियम बताए गए है, जिन्हें हर व्रती को पालन करना चाहिए। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने पर मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। तो अाइए आज बात करते हैं कि एकादशी में चावल क्यों नहीं खाने चाहिए।


अक्सर हमने लोगों को कहते सुना होगा कि एकादशी के दिन चावल और इससे बनी कोई भी चीज़ नही खानी चाहिए। लेकिन इसके पीछे का कारण या कहें असल वजह क्या है शायद ही किसी को पता होगा।

दरअसल माता शक्ति के क्रोध से बचने के लिए भयभीत महर्षि मेधा ने अपने योग बल से शरीर छोड़ दिया और उनकी मेधा पृथ्वी में समा गई। वही मेधा जौ और चावल के रूप में उत्पन्न हो गई। कहा जाता है कि यह जौ और चावल महर्षि की ही मेधा शक्ति हैं, जो जीव हैं। इसलिए इस दिन चावल खाना महर्षि मेधा के शरीर के छोटे-छोटे मांस के टुकड़े खाने जैसा माना गया है इसलिए इस दिन से जौ और चावल को जीवधारी माना गया है।

इसके साथ ही एकादशी के दिन चावल न खाने के पीछे वैज्ञानिक का कारण भी है। जिसके अनुसार चावल में जल की मात्रा ज्यादा होती है। जल पर चंद्रमा का प्रभाव अधिक पड़ता है। चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है इससे मन विचलित और चंचल होता है। मन के चंचल होने से व्रत के नियमों का पालन करने में बाधा आती है। एकादशी व्रत में मन का निग्रह और सात्विक भाव का पालन अति आवश्यक होता है इसलिए एकादशी के दिन चावल से बनी चीजें खाना वर्जित कहा गया है।
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