क्रिस्टोफर वुड को भारतीय अर्थव्यवस्था पर है दोगुना भरोसा

मुंबई: वैश्विक ब्रोकरेज हाउस सीएलएसए के मुख्य रणनीतिकार क्रिस्टोफर वुड को भारतीय अर्थव्यवस्था पर 'दोगुना' भरोसा है। जापान के इतर एशिया पेसेफिक बाजारों के तुलनात्मक रिटर्न पोर्टफोलियो में भारत का आंकलन करते हुए उन्होंने घरेलू बाजार पर दोहर विश्वास जताया। हालांकि, उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें और डॉलर व रुपए की स्थिति भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ा जोखिम है। अपने साप्ताहिक न्यूजलेटर ग्रीड एंड फीयर में वुड ने कहा कि आने वाले महीनों में वे भारत की ठोस बुनियाद के आधार पर अपना भरोसा बढ़ा सकते हैं।

उन्होंने उम्मीद जताई की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव जीतेंगी और निवेश चक्र से बेहतर रिटर्न हासिल होगा। हांगकांग के इस निवेशक ने आगामी आम चुनावों को बाजार के लिए अहम कड़ी बताया, मगर हिदायत दी कि निवेशकों को राज्यों के विधानसभा चुनावों पर जरूरत से ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। वुड ने कहा, "इन चुनावों को भारतीय जतना पार्टी की अग्नि परीक्षा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि ये चुनाव स्थानीय मुद्दों पर आधारित होते हैं। बीजेपी की असली परीक्षा अगले साल अप्रैल-मई के दौरान आम चुनावों में ही होगी।" उन्होंने जीएसटी को आर्थिक सुधारों मील का पत्थर बताते हुए कि यह सरकार के लिए बड़ी उपलब्धि है। इसका असली असर धीरे-धीरे सामने आ रहा है और आने वाले महीनों में तस्वीर और बेहतर होगी। हालांकि, वुड ने एनपीए की समस्या को मोदी सरकार की नाकामी कर दिया।

वुड ने कहा, "नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में कई संस्थागत और संरचनागत सुधार किए हैं। इसका फायदा इसे अगले पांच साल में मिल सकता है, यदि हम मान कर चलें की मौजूदा सरकार ही सत्ता में लौटेगी। हालांकि, सीटें कम जरूर हो सकती हैं।" उन्होंने कहा कि मई 2014 में ही सत्ता में काबिज होने के बाद से ही मोदी सरकार ने इस दिशा में कोई खास ध्यान नहीं दिया। हालांकि, उसी समय से स्पष्ट संकेत मिल रहे थे कि एनपीए की समस्या काफी गंभीर है और इस पर जोर देना काफी अहम है।
 

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