फिर सुर्खियों में आया ट्रीमैन, 25 सर्जरियों के बावजूद हाथों पर उगे 'पेड़'

कोलकाताः बांग्लादेश के 'ट्री मैन' कहे जाने वाले अबुल बाजंदर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। बांग्लादेश के अबुल बाजंदर (28) एक दुर्लभ बीमारी से जूझ रहे हैं। इस बीमारी के चलते उनके हाथ-पैर की चमड़ी पर पेड़ जैसी संरचना बनने लगती है। तीन साल पहले जब अबुल सुर्खियों में आए तो उनकी इस बीमारी ने पूरी दुनिया का ध्यान उनकी तरफ खींचा था। हाथ-पैरों पर पेड़ की शाखाओं की तरह उगने वाली उस ग्रोथ को हटाने के लिए अबुल की कई सर्जरी हुई लेकिन एक बार फिर से उनकी यह बीमार लौट आई है। बाजंदर को Epidermodysplasia Verruciformis नाम की बीमारी है। इस बीमारी से हाथ-पैर पर पेड़ की शाखाओं के जैसे संरचना के कारण बाजंदर अपने ही शरीर का बोझ सहन नहीं कर पाता है।

बीच में ही छोड़ा इलाज
अबुल का इलाज करने वाले ढाका मेडिकल कॉलेज ऐंड हॉस्पिटल में बर्न ऐंड प्लास्टिक सर्जरी यूनिट के को-ऑर्डिनेटर डॉ. समंथा लाल सेन ने बताया कि यह एक जटिल बीमारी है और हम इस पर धीरे-धीरे सफलता हासिल कर रहे थे लेकिन बांजंदर पूरी तरह से ठीक हो पाता उससे पहले ही वो अपने घर को चला गया। डॉ. समंथा ने कहा कि हमने अबुल को कई बार वापिस आकर इलाज कराने को कहा लेकिन वह नहीं आया और उसकी बीमारी एक बार फिर लौट आई। डॉ. समंथा ने बताया कि 20 जनवरी को वह अपनी मां के साथ अस्पताल आया तो हमने देखा कि उसकी हालत अब और भी खराब हो गई है, उसके हाथ और पैरों पर छाले एक-एक इंच बढ़ गई हैं। जॉक्टर ने कहा कि हमें अब फिर से शुरुआत में इलाज शुरू करना हो और उसे ठीक करने के लिए फिर से 5-6 ऑपरेशन करने होंगे। डॉक्टर के मुताबिक अबुल का इलाज 2016 में शुरू किया था जिसके बाद वह करीब 25 सर्जरियों का सामना कर चुका है।

क्या है Epidermodysplasia Verruciformis
यह बीमारी इम्यून सिस्टम में एक डिफेक्ट की वजह से होती है जिसमें व्यक्ति के HPV (human papilloma virus) का शिकार होने की आशंका बढ़ जाती है जिससे स्किन लेसियन्स और मेलानोमा स्किन कैंसर जैसी बीमारियों के होने का खतरा बढ़ जाता है। स्किन ग्रोथ से जुड़ी यह बीमारी काफी दुर्लभ है और पूरी दुनिया में इसके कम ही मामले सामने आते हैं।

बेटी को गोद में खेलाना चाहता है अबुल
2016 में जब अबुल की सर्जरी होने वाली थी तब उसने कहा था कि वह एक बार अपनी बेटी को गोद में खेलाना चाहता है, उसे पकड़ना चाहता है। तब उसने कहा था कि वह भी सामान्य जीवन जीना चाहता है। 2017 में सर्जरी के बाद उसकी हालत कुछ ठीक हो गई थी। वह अपने हाथ खाना खाने और लिखने जैसे काम करने लग गया था लेकिन उसने इलाज पूरा नहीं करवाया। उसके इलाज का सारा खर्चा तब सरकार ने उठाया था।

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