अयोध्या के कारसेवकपुरम में पत्थरों की नक्काशी का 50 प्रतिशत काम पूरा, कारीगरों की संख्या हुई कम

अयोध्याः अयोध्या के कारसेवकपुरम में राम जन्मभूमि न्यास द्वारा संचालित कार्यशाला में कार्य की प्रगति धीमी हो गई है। ऐसा कोष की कमी और कारीगरों एवं शिल्पकारों की संख्या में कमी आने के कारण हुआ है। यह जानकारी ‘मंदिर’ निर्माण के लिए 1990 से चलाई जा रही कार्यशाला के प्रभारी ने दी है। 

कारसेवकमपुरम की विशाल कार्यशाला में भारत के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु आते हैं। कुछ जिज्ञासावश आते हैं जबकि कुछ अन्य स्थानीय गाइड के साथ आते हैं। यहां पर एक शीशे के बॉक्स में प्रस्तावित राम मंदिरका लकड़ी का मॉडल भी रखा हुआ है। कार्यशाला के प्रभारी अन्नू भाई सोमपुरा ने अपने परिसर में खुले मैदान में नक्काशी करके रखे गए पत्थरों की ओर इशारा करते हुए कहा कि ये तैयार अवस्था में हैं और इसे एक साथ जोड़ा जा सकता है।

उन्होंने बताया कि पत्थरों की नक्काशी का 50 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। इसका मतलब है कि पहली मंजिल पूरी हो गई है। हमें उम्मीद है कि अयोध्या भूमि मालिकाना हक मामले में उच्चतम न्यायालय से अनुकूल फैसला आएगा और एक बार हमें हरी झंडी मिल जाए तो आधारशिला रखने का काम शुरू हो जाएगा। 78 वर्षीय सोमपुरा ने बताया कि योजना के मुताबिक, बनने वाला मंदिर 268 फुट लंबा, 140 फुट चौड़ा और जमीन से लेकर शिखर तक 128 फुट ऊंचा होगा।

उन्होंने कहा कि सभी तलों पर 106 खंभे होंगे और प्रत्येक खंभे पर 16 मूर्तियां होंगी। ऐसे में कारीगरों ने इन पर नक्काशी का काम पूरा कर लिया है। सोमपुरा ने कहा मंदिर का पूर्व निर्माण का काम इस समय श्रद्धालुओं के ‘व्यक्तिगत दान’ से चल रहा है। उन्होंने बताया कि ‘पूर्व में जितना धन आता था, अब उतना नहीं आ रहा है। यह पूछे जाने पर कि कारसेवकपुरम की कार्यशाला में इस समय कितने लोग काम कर रहे हैं उन्होंने बताया कि लगभग दो शिल्पकार और कुछ मजदूर हैं।

प्रभारी ने बताया कि उनकी संख्या कम हो गई है, इनमें से कुछ लोगों ने दूसरे काम के लिये यहां का काम छोड़ दिया। 1990 में उनकी संख्या तकरीबन 150 थी। कारीगर सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक काम करते हैं और केवल अमावस्या के दिन काम बंद रहता है। राम जन्मभूमि न्यास दक्षिणपंथी संगठन विश्व हिंदू परिषद द्वारा सर्मिथत है।  
 

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