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समय का प्रबंधन

2020-07-07T16:03:17.877

समय-प्रबंधन का हमारे जीवन में विशेषकर हमारे विद्यार्थी जीवन में बड़ा महत्व है। समय की महिमा अपरम्पार है। समय के उचित प्रबंधन पर ही हमारी प्रगति और विकास की नींव टिकी हुयी है।बड़ी बड़ी योजनायें और विकास की यात्राएँ भी समय के उचित प्रबंधन पर ही आधारित रहती हैं।समय बड़ा बलवान होता है। उसके महत्व को समझना और उसकी कद्र करना बहुत ज़रूरी है।

समय मनुष्य की न तो प्रतीक्षा करता है और न परवाह। जो लोग भीड़ को चीरते हुए, आलस्य को छोड़कर अपने लक्ष्य को पाने का यत्न करते हैं, वे अपने लक्ष्य को पा जाते हैं। पर, जो अपनी अकर्मण्यता, आलस्य, भीरुता या निद्रा के कारण पड़े रह जाते हैं, वे अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाते हैं। जीवन में सफलता उन्हीं को नसीब  होती है, जो अपने एक क्षण का भी अपव्यय नहीं करते हैं। समय प्रबंधन की अमूल्यता के बारे में कबीर ने कितनी महत्वपूर्ण शिक्षा दी है  'काल करे सो आज कर, आज करे सो अब, पल में परलै होयेंगी, बहुरि करैगो कब ?” हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जीवन की सफलता का रहस्य समय के सदुपयोग में ही निहित है। 

समय की उपयोगिता साधारण से साधारण व्यक्ति को भी महान् बना देती है। आज तक जितने भी महान् पुरुष हुए उनके जीवन की सफलता का रहस्य एकमात्र समय के अमूल्य क्षणों का सदुपयोग और उचित प्रबंधन ही रहा है। 

आलस्य त्याग कर यथासमय प्रत्येक कार्य को करना ही समय का प्रबंधन है। जो मनुष्य आज का काम कल पर टाल देते हैं, उनका काम कभी पूरा नहीं होता। वे जीवन में सदैव पश्चाताप की अग्नि में जलते रहते। बुद्धिमान व्यक्ति अपने समय को कभी व्यर्थ नहीं जाने देता। ज्ञानवर्धक पुस्तकें पढ़ता है और अपना समय अच्छे कामों में लगाता है जबकि मूर्ख अपना समय बुरे व्यसनों में, सोने में या आपस के लड़ाई-झगड़ों में ही खो देते हैं। उनकी दृष्टि में न तो समय का मूल्य होता है और न जीवन की क्षण-भंगुरता का कोई ज्ञान। समय का अपव्यय करना आत्महत्या के समान है। समय की दुरुपयोगिता मानव को कायर, पुरुषार्थहीन, आलसी और अकर्मण्य बना देती है। समय की दुरुपयोगिता से केवल विचार एवम् आचरण ही दूषित नहीं होते, बल्कि मानव का नैतिक पतन भी हो जाता है।

समय के उचित प्रबंधन के लिए आवश्यक है कि व्यक्ति अपने प्रतिदिन के कार्य का सम्यक् विभाजन कर ले यानी टाइम टेबल बना ले । उसे दृष्टि में रख लेना चाहिए कि उसे किस समय कौनसा काम काम करना है? जिस मनुष्य का कार्यक्रम सुनिश्चित नहीं होता उसका अधिकांशrसमय व्यर्थ में ही इधर-उधर बीत जाता है। जो मनुष्य अपना निश्चित कार्यक्रम बनाकर, मानसिक वृतियों को एकाग्र करके कार्य करता है, उसे जीवन-संग्राम में अवश्य सफलता प्राप्त होती है। विद्यौर्थियों को अपने समय कां सदुपयोग करने के लिए टाइमटेविल बना लेना चाहिए। उन्हें ध्यान रखना चाहिए कि उनका निश्चित: कार्य उस निश्चित समय में पूर्ण हुआ अथवा नहीं। जो छात्र नियत समय में अपने कार्य में पूर्ण मनोयोग के साथ संलग्न नहीं होता, वह अपने साय घोर अन्याय करता है। उसका भविष्य अन्धकारमय रहता है। समय विभाजन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिये कि शारीरिक और मानसिक थकावट अधिक न होने पावे। उसमें मनोरंजन की भी व्यवस्था करनी चाहिए। मनोरंजन से जीवन में सरसता आती है, शक्ति सञ्चय होता है।

समय का सदुपयोग करने से मनुष्य की व्यक्तिगत उन्नति होती है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए समय पर सोना, समय पर उठना, समय पर भोजन करना, समय पर टहलना, समय पर पढ़ना बहुत ही आवश्यक है। मानसिक उन्नति के लिए हमें प्रारम्भ से ही सद्ग्रन्थों का अध्ययन करना चाहिए तथा अपने से बड़े, अपने से चधिक बुद्धिमान लोगों के साथ जीवनोपयोगी विषयों पर चर्चा करनी चाहिए। चिस काम के लिए जो समय निश्चित हो, उस समय वह काम अवश्य कर लेना चाहिए, तभी मनुष्य जीवन में उन्नति कर पाता है। कभी किसी काम को देर से शुरू न करो क्योंकि प्रारम्भ में विलम्ब हो जाने से अन्त तक विलम्ब होता रहता है उस कार्य में सफलता संदिग्ध रहती है। विदेशों में समय का मूल्य बहुत समझा जाता है। वहाँ का प्रत्येक व्यक्ति उसका सदुपयोग करना जानता है। यदि आपने किसी व्यक्ति को आठ बजे बुलाया है तो वृह आपके पास ठीक आठ बजे ही अॉयेगा, न एक मिनट पूर्व और न एक मिनट पश्चात् । देश और समाज के प्रति हमारे कुछ कर्तव्य हैं। हमें अपना कुछ समय उनकी सेवा में भी लगाना चाहिए, जिससे देश और समाज की उन्नति हो। 'असहायों की सहायता करने में, भूखों के पेट भरने में, दूसरों के हित सम्पादन में जो अपना कुछ समय व्यतीत करता है वह भी-समय का सदुपयोग करता है तथा उसका समाज में सम्मान होता है। हमें अपने दैनिक कार्यक्रमों में राष्ट्रसेवा, जाति सेवा और समाज सेवा का अवसर भी निकालना चाहिए। स्वार्थ-सिद्धि ही मानवजीवन का प्रमुख लक्ष्य नहीं है। इस जीवन में जितने शुभ कार्य हो सकें उतना ही यह जीवन सफल है। मानव-जीवन देश की सम्पति है। अत: देशहित में जो अपना समय व्यतीत करता है, वह धन्य है। मनुष्य का परम कर्तव्य है कि वह अपने समय का सदुपयोग करता हुआ अपने समाज, अपने देश और मानव-जाति की सेवा में अपना समय लगावे।

जो व्यक्ति समय का उचित प्रबंधन नहीं करते वे जीवन में उन्नति नहीं कर पाते। उनके जीवन के अधिकाँश क्षण सुस्ती, सोने और वाद-विवाद में ही व्यतीत हो जाते हैं। ऐसा मनुष्य न तो छात्रावस्था में विद्योपार्जन ही कर सकता है और 'न युवावस्था में गृहस्थी का भार ही वहन कर सकता है। इतिहास साक्षी है कि समय का सदुपयोग और उचित प्रबंधन करने वाले व्यक्ति ही साहित्व के सृष्टा, राष्ट्रनायक, वैज्ञानिक और आविष्कारक हुए हैं। प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह समय का उचित प्रबंधन करे।तभी सफलता उसके कदम चूमेगी।

(डॉ० शिबन कृष्ण रैणा)  

 


Author

Riya bawa

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