गृह मंत्री शाह ने अमरनाथ यात्रा की तैयारियों और सुरक्षा की समीक्षा की

punjabkesari.in Tuesday, May 17, 2022 - 06:46 PM (IST)

नयी दिल्ली, 17 मई (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर में मौजूदा स्थिति का आकलन करने के लिए सुरक्षा प्रतिष्ठान के शीर्ष अधिकारियों के साथ मंगलवार को लगातार तीन बैठकें कीं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि हाल में नागरिकों की हत्या की घटनाओं और आगामी अमरनाथ यात्रा को लेकर इन बैठकों में चर्चा की गई।

अधिकारियों ने बताया कि अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू कश्मीर प्रशासन अब प्रत्येक तीर्थयात्री को ‘रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन कार्ड’ (आरएफआईडी) प्रदान करेगा।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों ने भी तीनों बैठकों में शिरकत की। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल, सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे और जम्मू-कश्मीर के पुलिस प्रमुख दिलबाग सिंह तीर्थयात्रा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा करने के लिए इन बैठकों में शामिल हुए।

केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने बाद में जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव के हवाले से बताया कि प्रत्येक तीर्थयात्री को आरएफआईडी प्रदान किया जाएगा और पांच लाख रुपये का बीमा किया जाएगा।

शाह ने कहा कि तीर्थयात्रियों के लिए बिना किसी परेशानी के यात्रा संपन्न कराना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि अतिरिक्त बिजली, पानी और दूरसंचार सुविधाओं सहित सभी व्यवस्था की जाए।

गृह मंत्री ने यात्रा मार्ग पर मोबाइल ‘कनेक्टिविटी’ बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद यह पहली यात्रा है और ऊंचाई अधिक होने के कारण जिन यात्रियों को स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या है, उनके लिए पर्याप्त व्यवस्था करनी होगी।

शाह ने पर्याप्त संख्या में ऑक्सीजन सिलेंडर, 6,000 फुट से अधिक की ऊंचाई पर चिकित्सा बिस्तरों और किसी भी आपातकालीन चिकित्सा स्थिति से निपटने के लिए एम्बुलेंस और हेलीकॉप्टर की तैनाती करने को कहा। उन्होंने कहा कि यात्रियों की सुविधा के लिए अमरनाथ यात्रा के दौरान सभी श्रेणियों की परिवहन सेवाओं को बढ़ाया जाए।

बैठक के दौरान, दक्षिण कश्मीर में पहलगाम से यात्रा मार्ग के 39 किलोमीटर के दौरान ‘कनेक्टिविटी’ सुनिश्चित करने के लिए ‘वाईफाई हॉटस्पॉट’ बनाने का भी निर्णय लिया गया।

यह यात्रा 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित गुफा मंदिर तक की जाती है, जो भगवान शिव को समर्पित है।
वार्षिक अमरनाथ यात्रा 2020 और 2021 में कोरोना वायरस महामारी के कारण नहीं हो सकी थी। साल 2019 में, अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को निरस्त करने से ठीक पहले इसकी अवधि घटा दी गई थी।
यह सरकार के लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती भी है। अधिकारियों ने बताया कि यात्रा के दो मार्गों पर अर्धसैनिक बलों के कम से कम 12,000 जवानों के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस के हजारों कर्मियों को भी तैनात किए जाने की उम्मीद है। तीर्थयात्रा का एक मार्ग पहलगाम से और दूसरा बालटाल होते हुए है। ड्रोन कैमरे सुरक्षा बलों को यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेंगे।

अमरनाथ तीर्थयात्रा के अलावा, बैठकों में सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।

बडगाम जिले में 12 मई को सरकारी कर्मचारी राहुल भट की आतंकवादियों ने उनके कार्यालय के अंदर घुसकर हत्या कर दी थी। कश्मीरी पंडित भट की हत्या के एक दिन बाद, पुलिस कांस्टेबल रियाज अहमद ठोकर की पुलवामा जिले में उनके आवास पर आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

पिछले सप्ताह जम्मू में कटरा के निकट एक बस में आग लगने से चार श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी और कम से कम 20 अन्य घायल हो गए थे। पुलिस को शक है कि आग लगाने के लिए शायद “स्टिकी’’ (चिपकाने वाले) बम का इस्तेमाल किया गया था।

भट की हत्या के बाद कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए है। उन्होंने घाटी में प्रदर्शन किया और अपने समुदाय के सरकारी कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने तथा उनकी सुरक्षा बढ़ाने की मांग की ।

जम्मू-कश्मीर की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के साझा मंच ‘‘गुपकर घोषणापत्र गठबंधन’’ ने रविवार को कश्मीरी पंडित कर्मचारियों से अपील की थी कि वे घाटी छोड़कर नहीं जाएं। गठबंधन ने कहा था कि यह उनका घर है और यहां से उनका जाना ‘‘सभी के लिए पीड़ादायक होगा।’’



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PTI News Agency

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