धनशोधन मामले के खिलाफ पीएफआई की याचिका पर अदालत ने ईडी से मांगा जवाब

punjabkesari.in Thursday, Dec 09, 2021 - 09:49 AM (IST)

नयी दिल्ली, आठ दिसंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की उस याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया जिसमें एजेंसी द्वारा 2018 में दर्ज धन शोधन मामले और उसके बाद की कार्यवाही को चुनौती दी गई थी।


न्यायमूर्ति अनु मल्होत्रा ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए केंद्रीय एजेंसी को जवाब देने के लिये चार हफ्ते का वक्त दिया।


पीएफआई के वकील अदित पुजारी ने दावा किया कि ईडी के इस मामले में “रोविंग एंड फिशिंग इंक्वायरी” (ऐसे प्रश्न पूछना जो विषय वस्तु से बिल्कुल भी जुड़े नहीं हैं) के लिए देश भर से उसके कई सदस्यों को 150 से अधिक समन प्राप्त हुए हैं।


अदालत ने मामले को चार फरवरी को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करते हुए कहा कि उसे “उम्मीद थी कि बयान दर्ज करने के समय प्रतिवादी (ईडी) के सीसीटीवी कैमरे चालू रहेंगे।”

पुजारी ने कहा कि ईडी की वर्तमान जांच राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के एक मामले से संबद्ध हुई है, जो केरल में युवाओं को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए कथित प्रशिक्षण से संबंधित है।


उन्होंने कहा कि यह एनआईए का मामला था कि अप्रैल 2013 में एक बैठक में इस तरह के प्रशिक्षण के प्रयोजनों के लिए बम, लाठी, ईंट आदि पाए गए थे।


पुजारी ने कहा कि बाद में, निचली अदालत ने जहां कुछ व्यक्तियों को भारतीय दंड संहिता, यूएपीए और विस्फोटक अधिनियम के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया, संबंधित उच्च न्यायालय ने अपील में, याचिकाकर्ता सहित आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ यूएपीए के अपराधों को हटा दिया।


वकील ने तर्क दिया कि जब उच्च न्यायालय ने गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम (यूएपीए) के तहत अपराधों के आरोपियों को बरी कर दिया और यह निष्कर्ष दिया कि कोई राष्ट्र विरोधी गतिविधियां नहीं हुई थी, तो ईडी के पास याचिकाकर्ता के खिलाफ मामले में आगे बढ़ने का कोई कारण नहीं है।


उन्होंने यह भी दावा किया कि ईडी पूछताछ के स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने के संबंध में उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं कर रहा है।


ईडी की ओर से पेश वकील अमित महाजन ने कहा कि एजेंसी शीर्ष अदालत के निर्देशों का अक्षरश: पालन कर रही है।


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PTI News Agency

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