अनियमितताओं को छुपाने के लिए संकाय सदस्य को निलंबित किया गया, जेएनयूटीए का आरोप

10/11/2021 11:34:14 PM

नयी दिल्ली, 11 अक्टूबर (भाषा) जेएनयूटीए ने सोमवार को दावा किया कि 88 लाख रुपये से अधिक के वित्तीय गबन के आरोप में संकाय के एक सदस्य का निलंबन कुलपति ने अपनी ‘‘निष्क्रियता’’ और वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने के लिए करवाया।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने एक बयान में दावा किया कि जेएनयू की कार्यकारी परिषद (ईसी) की पूर्व में हुई आपात बैठक में एक प्रोफेसर और कुछ कर्मचारियों के खिलाफ ‘‘धन की कथित हेराफेरी’’ के लिए निलंबन और आपराधिक कार्रवाई शुरू करने निर्णय लिया गया था।

बयान में कहा गया, ‘‘धोखाधड़ी और गबन दोनों ही जेएनयू के नियमों का गंभीर उल्लंघन है, फिर भी पूरी कवायद, कार्यकारी परिषद में स्पष्ट रूप से कुलपति द्वारा रची गई थी जिसका कार्यकाल आठ महीने पहले समाप्त हो गया था।’’ बयान में कहा गया है कि कुलपति ने ऐसा अपनी निष्क्रियता और पिछले पांच वर्षों में प्रशासन द्वारा सार्वजनिक धन के कुप्रबंधन के कारण हुई वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने के प्रयास के तहत किया।

इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय से तत्काल प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी।

बयान में कहा गया है कि मामले की जांच के लिए गठित तथ्यान्वेषी समिति की सिफारिशों के बावजूद आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक जांच का आदेश नहीं दिया गया। जेएनयूटीए के बयान में कहा गया है, ‘‘...जेएनयू कार्यकारी परिषद को सलाह दी गई थी कि आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ जांच केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और पुलिस को सौंपी जाए। कार्यकारी परिषद ने ऐसा यह पड़ताल किये बिना ही किया है कि क्या ऐसा मामला सीवीसी के अधिकार क्षेत्र में आता है।’’


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PTI News Agency

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