अदालत ने निजी जासूसों के विनियमन के लिए दिशानिर्देश तैयार करने पर केंद्र का रुख पूछा

09/23/2021 10:39:36 AM

नयी दिल्ली, 22 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने निजी तौर पर जासूसी करने वालों की गतिविधियों के विनियमन के लिए दिशानिर्देश तैयार किए जाने के अनुरोध वाली याचिका पर बुधवार को केंद्र को अपना रुख स्पष्ट करने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने केंद्र को अपना जवाब देने के लिए छह हफ्ते का समय दिया और कहा कि वह "इस मुद्दे पर गौर करने की इच्छुक हैं।" वह निजी तौर पर जासूसी करने वाले एक अन्वेषक द्वारा की गई कथित अवैध जांच से परेशान एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थीं।
अदालत ने केंद्र से कहा, ‘‘... पुट्टास्वामी प्रकरण (निजता के अधिकार पर फैसले) के बाद भी आप इसे विनियमित नहीं कर रहे हैं। आपको संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा। आपको ध्यान रखना होगा।”
केंद्र सरकार के वकील अमित महाजन ने कहा कि याचिकाकर्ता भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है जो निजी तौर पर जासूसी करने वालों द्वारा किए गए किसी भी अपराध पर लागू होता है।

उन्होंने कहा, "ये पेशेवर हैं। हर चीज के लिए दिशानिर्देश नहीं हो सकता... सभी (पेशेवरों) को कानून का पालन करना होगा। भादंसं, आईटी कानून मौजूद हैं। प्राथमिकी या शिकायत दर्ज की जा सकती है।”
अदालत ने स्पष्ट किया कि वह याचिका में उठाए गए किसी अन्य मुद्दे पर गौर नहीं कर रही है और याचिकाकर्ता कानून के अनुसार उचित उपाय तलाशने के लिए स्वतंत्र हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि एक निजी तौर पर जासूसी करने वाले व्यक्ति ने उनके मुवक्किल से जुड़ी कुछ व्यक्तिगत जानकारी एक विदेशी नागरिक के साथ साझा की। उन्होंने दावा किया कि देश में कई ऐसे जासूस बिना किसी निगरानी के काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि इस संबंध में 2007 में राज्यसभा में एक विधेयक पेश किया गया था, लेकिन अंततः कोई प्रगति नहीं हुई है।

मामले में अगली सुनवाई 10 जनवरी को होगी।



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PTI News Agency

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