अदालत ने छात्र कार्यकर्ताओं की तत्काल रिहाई पर रोक लगाई, सत्यापन रिपोर्ट मांगी

2021-06-15T21:51:56.99

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को जेएनयू की छात्राओं देवांगना कालिता और नताशा नरवाल की जेल से तत्काल रिहाई पर रोक लगाते हुए पुलिस से बुधवार तक सत्यापन रिपोर्ट देने के लिये कहा है। छात्राओं को दंगों की ''साजिश'' के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है।

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा जमानत प्रदान किये जाने के कालिता और नरवाल ने न्यायिक हिरासत से तत्काल रिहाई के लिये अदालत का रुख किया ।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रवीन्दर बेदी ने उनकी अर्जी को खारिज कर दिया और पुलिस को 16 जून को दोपहर एक बजे तक आरोपियों और जमानतदारों के विवरण के बारे में सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।

इससे पहले, उच्च न्यायालय ने नरवाल, कालिता और जामिया के छात्र आसिफ इकबाल तनहा को जमानत न देने के निचली अदालत के आदेशों को रद्द कर दिया। दोनों महिला कार्यकर्ताओं ने न्यायिक हिरासत से तत्काल रिहाई के लिये अपने अधिवक्ता अदित एस पुजारी के जरिये अदालत का रुख किया। उच्च न्यायालय ने इन्हें 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानतदारों पर रिहा करने का निर्देश दिया है।

गौरतलब है कि 24 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्व दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा भड़क गई थी, जिसने सांप्रदायिक टकराव का रूप ले लिया था। हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हो गई थी तथा करीब 200 लोग घायल हो गए थे। तीनों छात्र कार्यकर्ताओं के साथ 17 अन्य आरोपियों को दंगों की साजिश के आरोप में मई 2020 में गिरफ्तार कर लिया गया था।



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PTI News Agency

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