ग्रांट थॉर्नटन की ऑडिट रिपोर्ट के बाद ऋणदाताओं ने रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस को ‘क्लीन चिट’ दी

2020-09-28T22:29:28.893

नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) ग्रांट थॉर्नटन की स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में आरसीएफएल के खातों में किसी तरह की धोखाधड़ी सामने नहीं आई है। इसके बाद राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) सहित अन्य ऋणदाताओं ने रिलायंस कैपिटल की गैर- बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) रिलायंस कमर्शिलय फाइनेंस लि. (आरसीएफएल) को ‘क्लीन चिट’ दे दी।
रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों के कुल बकाया ऋण में से आरसीएफएल पर 11,620 करोड़ रुपये, रिलायस होम फाइनेंस लि. (आरएचएफएल) पर 7,430 करोड़ रुपये और रिलायंस कैपिटल (एकल) पर 6,750 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है।
कुल कर्ज में मियादी ऋण, नकद ऋण और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर शामिल हैं। पिछले साल ऋणदाताओं ने रिलायंस कैपिटल की दो इकाइयों ... सूचीबद्ध आरएचएफएल और आरसीएफएल के ग्रांट थॉर्नटन से फॉरेंसिक ऑडिट की अनुमति दी थी।
बैंकिंग सूत्रों ने बताया कि बैंक ऑफ बड़ौदा की अगुवाई वाले बैंकों के गठजोड़ ने ग्रांट थॉर्नटन द्वारा दी गई फॉरेंसिक ऑडित रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। इस रिपोर्ट में कहा किसी तरह की गड़बड़ी या धोखेबाजी नहीं हुई है।
उल्लेखनीय है कि अंतर-ऋणदाता करार (आईसीए) के तहत वाली सभी कंपनियों के लिए ऑडिटर की नियुक्ति करना मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) का हिस्सा होता है। यह रिजर्व बैंक द्वारा तय दिशानिर्देशों के तहत अनिवार्य है।
सूत्रों ने बताया कि ऋणदाताओं द्वारा रिपोर्ट को स्वीकार किए जाने के बाद आरसीएफएल को ‘क्लीन चिट’ दी गई है।
बैंक ऑफ बड़ौदा की अगुवाई में 25 सितंबर को बैंकों के गठजोड़ की बैठक में नाबार्ड ने सूचित किया कि फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट की जांच के बाद किसी तरह की गड़बड़ी नहीं मिली है और उसने ‘चेतावनी’ को हटा दिया है। नाबार्ड, आरसीएफएल का दूसरा सबसे बड़ा ऋणदाता है। उसने कंपनी को करीब 1,100 करोड़ रुपये का कर्ज दिया है।


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PTI News Agency

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