हरित रणनीतिक साझेदारी के लिए संबंधों को प्रगाढ़ बनाएंगे भारत व डेनमार्क

2020-09-28T22:39:59.8

नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) भारत और डेनमार्क ने ''हरित रणनीतिक साझेदारी'' के लिए सोमवार को अपने संबंधों को प्रगाढ़ बनाने का फैसला किया। इसका मकसद नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग के महत्वपूर्ण विस्तार के लिए रूपरेखा तैयार करना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन के बीच लगभग एक घंटे चली डिजिटल द्विपक्षीय शिखर बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस दौरान उन्होंने काफी अरसे से लंबित भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता, कोविड​​-19 महामारी की चुनौती और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर इसके प्रभाव पर भी विचार-विमर्श किया।

विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (मध्य यूरोप) नीता भूषण ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि पुरुलिया में हथियार गिराए जाने के मामले में प्रमुख आरोपी किम डेवी का मुद्दा भी उठा और इस बात पर सहमति बनी कि इस मामले के शीघ्र हल के लिए दोनों पक्षों के अधिकारी संपर्क में रहेंगे।
भारत इस सनसनीखेज मामले में मुकदमे का सामना करने के लिए डेनमार्क से डेवी के प्रत्यर्पण की मांग करता रहा है।

भूषण ने वार्ता के समग्र परिणाम पर कहा, "दोनों प्रधानमंत्रियों ने हरित रणनीतिक साझेदारी के लिए भारत-डेनमार्क संबंधों को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। हमारे प्रधानमंत्री ने कहा कि यह एक नए युग की साझेदारी थी और हम अपने द्विपक्षीय संबंधों में एक नया आयाम जोड़ेंगे।"
उन्होंने कहा कि इस कदम से दोनों देशों को आर्थिक संबंधों और हरित विकास के विस्तार में मदद मिलेगी वहीं जलवायु परिवर्तन लक्ष्यों के कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने के साथ वैश्विक चुनौतियों के समाधान में सहयोग को मजबूती मिलेगी।
मोदी ने शिखर सम्मेलन में अपने शुरुआती संबोधन में कहा कि कोरोना वायरस महामारी ने किसी एक स्रोत पर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की अति निर्भरता से जुड़े जोखिम को उजागर किया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ काम कर रहा है ताकि आपूर्ति श्रृंखला में विविधता लायी जा सके।
उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों की घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हमारे जैसे समान विचार वाले देशों के लिए एक साथ काम करना कितना अहम है, जो नियम-आधारित, पारदर्शी, मानवीय और लोकतांत्रिक मूल्य-प्रणाली साझा करते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि टीका विकसित करने में समान सोच वाले देशों के बीच सहयोग इस महामारी से निपटने में भी मदद करेगा।

दोनों नेताओं की वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण, जल, अर्थव्यवस्था, सतत शहरी विकास, व्यापार, जहाजरानी, खाद्य, कृषि और जीवन विज्ञान जैसे क्षेत्रों में सहयोग के लिए सहमत हुए हैं।

बयान के अनुसार महत्वाकांक्षी लक्ष्यों और कार्यों की पहचान की जाएगी और एक कार्य योजना में शामिल किया जाएगा जिसे जल्द से जल्द तैयार किया जाएगा।

इसमें कहा गया है कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने समुद्री मामलों में गहन सहयोग की सराहना की और पोत निर्माण और डिजाइन, समुद्री सेवाओं तथा हरित नौवहन में सहयोग बढ़ाने की संभावना पर गौर किया।

संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने यूरोपीय संघ और भारत के बीच एक महत्वाकांक्षी, निष्पक्ष तथा पारस्परिक रूप से लाभप्रद व्यापार और निवेश समझौते के लिए काम करने की प्रतिबद्धता जतायी।
इस संधि के लिए वार्ता कई वर्षों से रुकी हुई है।

दोनों प्रधानमंत्रियों ने भारत-डेनमार्क जल प्रौद्योगिकी गठबंधन के जरिए जल क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए इच्छा व्यक्त की। इनमें जलापूर्ति, अपशिष्ट जल उपचार, सीवरेज प्रणाली, उपचारित अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग, जल प्रबंधन आदि शामिल हैं।

भूषण ने कहा कि मोदी ने उन क्षेत्रों में भारत-डेनमार्क हरित ऊर्जा पार्क की स्थापना का प्रस्ताव रखा जहां बड़ी संख्या में डेनिश कंपनियां हैं।

उन्होंने भारत डेनमार्क कौशल संस्थान की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा जिससे डेनमार्क की कंपनियां अपनी आवश्यकता के अनुसार कुशल श्रमिक प्राप्त कर सकेंगी।

अधिकारी के अनुसार प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया कि डेनमार्क के पास कौशल है और भारत के पास पैमाना है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में शामिल होने के डेनमार्क के फैसले का भी स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने मानवाधिकारों, लोकतंत्र और कानून के साझा मूल्यों को स्वीकार किया तथा लोकतंत्र और मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने के लिए बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग करने के लिए सहमत हुए।



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PTI News Agency

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