जामिया हिंसा मामले में एसआईटी, जांच आयोग गठित करने का उच्च न्यायालय से अनुरोध

2020-08-05T00:31:18.87

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय से जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में पिछले साल दिसंबर में हुई हिंसा मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) अथवा तथ्य अन्वेषी समिति अथवा जांच आयोग (सीओआई) गठित करने का मंगलवार को अनुरोध किया गया।
विश्वविद्यालय में यह हिंसा संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध से जुड़ी थी।

एसआईटी या एक समिति या सीओआई के लिए याचिकाएं मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ के समक्ष कई याचिकाओं की लगभग पांच घंटे की लंबी सुनवाई के दौरान पेश की गईं, जिनमें आरोप लगाया गया था कि पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने विश्वविद्यालय के अंदर छात्रों पर बेरहमी से अत्यधिक बल प्रयोग किया था।

याचिकाओं में पिछले साल विश्वविद्यालय में 13 और 15 दिसंबर को हुई हिंसा की घटनाओं में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।

वीडियो कॉन्फ्रेंस से हुई सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्वेस ने पीठ के समक्ष दलील दी कि एक ऐसी एसआईटी के गठन की जरूरत थी जोकि केंद्र सरकार और पुलिस से स्वतंत्र हो, जिन्होंने अपने आचरण से दर्शाया कि हिंसा को लेकर उनकी जांच ''''स्वतंत्र नहीं'''' थी।

उन्होंने हिंसा के वीडियो भी अदालत को दिखाए और दावा किया कि छात्रों के खिलाफ ''''अभद्र'''' भाषा का प्रयोग किया गया।

अन्य याचिकाकर्ताओं के वकील सलमान खुर्शीद ने तथ्य अन्वेषी समिति का अनुरोध करते हुए कहा कि इसी तरह का सुझाव उच्चतम न्यायालय की ओर से भी दिया गया था।
उन्होंने कहा कि इस तरह की समिति का गठन करना ‘‘सही मायने में छात्रों के जख्मों पर मरहम लगाने जैसा होगा।’’
एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने पीठ से मामले में जांच आयोग गठित करने का अनुरोध किया।




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PTI News Agency

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