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कंपनियों खुदके बिजलीघर में उत्सर्जन नियंत्रण प्रणाली लगाने को और समय देने की फिक्की की सिफरिश

2020-07-07T23:49:53.83

नयी दिल्ली, सात जुलाई (भाषा) उद्योग मंडल फिक्की ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से कंपनियों के स्वयं के लिए लगाए गए पुराने बिजली संयंत्रों में कतिपय गैसों का उत्सर्जन नियंत्रित करने के उपकरण लगाने की समयसीमा आगे बढ़वाने का आग्रह किया है।
निजी उपयोग वाले बिजली संयंत्रों के लिये पर्यावरण मानकों को पूरा करने के लिये एफजीडी (फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन) या उत्सर्जन नियंत्रण उपकरण लगाने की समयसीमा 30 जून 2020 थी।

पीएमओ में प्रधान सलाहकार पी के सिन्हा को लिखे पत्र में फिक्की ने कहा है कि बिजली और पर्यावरण मंत्रालयों को लेकर एक समिति बनायी जाए जो बिजली संयंत्रों में एफजीडी लगाने की समयसीमा की समीक्षा करे।

पत्र के अनुसार, ‘‘सरकार बिजली मंत्रालय और पर्यावरण मंत्रालय को लेकर एक समिति बना सकती है जो जरूरत और मौजूदा बाधाओं के आधार पर एफजीडी लगाने की समयसीमा की समीक्षा करे।’’
उल्लेखनीय है कि तापीय बिजली संयंत्रों को सल्फर डाईआक्साइड (एसओएक्स) और नाइट्रोजन आक्साइड (एनओएक्स)के लिये उत्सर्जन मानकों को पूरा करने की जरूरत है।

इन मानकों को पूरा करने के लिये विभिन्न बिजली संयंत्रों के लिये अलग-अलग समयसीमा है लेकिन सभी संयंत्रों को दिसंबर 2022 तक इस नियम का अनुपालन करना है।

केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के सभी बिजली संयंत्रों से लिये गये आंकड़े के अनुसार कइयों के काफी प्रयासों के बावजूद ज्यादातर संयंत्र उत्सर्जन मानकों को लेकर समयसीमा का अनुपालन करने की स्थिति में नहीं है।
फिक्की का कहना है कि एफजीडी उपकरण को खरीदना और आपूर्ति क्षमता महत्वपूर्ण मसला बन गया है।



यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

Edited By

PTI News Agency

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