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तोमर ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए एकीकृत क्षखेती पर जोर दिया

2020-06-30T21:54:36.25

नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को ‘आत्मनिर्भर भारत'' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जैविक और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों के साथ एकीकृत खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने राज्य सरकारों से किसानों को नए अवसर प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी नये परामर्शो को तुरंत लागू करने का भी आग्रह किया।
तोमर आईसीएआर की क्षेत्रीय समिति -1 की एक आभासी बैठक को संबोधित कर रहे थे जिसमें हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख शामिल हैं।
वर्ष 1975 से, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने कृषि-जलवायु क्षेत्रों के आधार पर आठ क्षेत्रीय समितियों का गठन किया है।
कृषि शिक्षा और खेती के नवीनतम रुझानों पर चर्चा करने के लिए हर दो साल में समितियों की बैठक आयोजित की जाती है।
एक सरकारी बयान में कहा गया, ’’तोमर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत के आत्मनिर्भर भारत अभियान के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जैविक और प्राकृतिक कृषि पद्धतियों के साथ एकीकृत खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया।’’ उन्होंने किसानों से किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) स्थापित करने का भी आग्रह किया और गांव के स्तर पर सभी किसानों के लिए कृषि और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की आवश्यकता पर जोर दिया।
तोमर ने आगे कहा कि आईसीएआर द्वारा गठित क्षेत्रीय समितियां कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि व्यवसाय के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास एजेंसियों के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने के लिए एक मंच प्रदान करती हैं।
कृषि राज्य मंत्री परषोत्तम रूपाला ने ''आत्मानबीर भारत'' के उद्देश्य को साकार करने के लिए एक रणनीति तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने कहा कि किसानों की समृद्धि, देश को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी और वैज्ञानिकों से जलवायु परिवर्तन की समस्याओं के समाधान के लिए काम करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
आईसीएआर के महानिदेशक त्रिलोचन महापात्र ने विभिन्न जलवायु वाले (टाइपोग्राफिक)क्षेत्रों में कृषक समुदायों के सामने आने वाली समस्याओं के त्वरित समाधान प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न शोधों पर प्रकाश डाला।
महापात्र ने जलवायु परिवर्तन के साथ जंगली जानवरों और चारे की समस्याओं को भी रेखांकित किया जिस चुनौती का कृषि और कृषक समुदायों द्वारा सामना किया जा रहा है।
उन्होंने राज्य सरकारों से विभिन्न प्रकार की कृषि और खेती से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए आईसीएआर द्वारा विकसित विभिन्न तकनीकों का उपयोग और प्रसार करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि विभिन्न समस्याओं से तुरंत और कुशलता से निपटने के लिए राज्यों के बीच विचारों और सुझावों के आदान-प्रदान की आवश्यकता है।


यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

Edited By

PTI News Agency

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