कारोना वायरस: गरीबों की मदद के लिये 1.70 लाख करोड़ रुपये का पैकेज, मुफ्त अनाज, रसोई गैस

2020-03-26T19:34:46.76

नयी दिल्ली, 26 मार्च (भाषा) सरकार ने बृहस्पतिवार को कोरोना वायरस महामारी को फैलने से रोकने के लिये लागू देशव्यापी ‘लॉकडाउन’ के बीच गरीबों, बुजुर्गों, स्वयं सहायता समूहों और निम्न आग वर्ग को राहत देते हुये 1.70 लाख करोड़ रुपये की ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ की घोषणा की।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित इस प्रोत्साहन पैकेज में गरीबों को तीन महीने के लिये मुफ्त अनाज, दाल और रसोई गैस सिलेंडर तथा महिलाओं और गरीब वरिष्ठ नागरिकों को नकद सहायता उपलब्ध कराना शामिल हैं। भवन एवं अन्य निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों के कल्याण के लिये केन्द्र सरकार के एक कानून के तहत कल्याण कोष बनाया गया है।
पैकेज के तहत गरीब परिवार के 80 करोड़ लोगों को प्रतिमाह पांच-पांच किलो गेहूं या चावल तथा प्रति राशनकार्ड एक किलो दाल अगले तीन महीने तक मुफ्त दी जायेगी। इसके अलावा 20.4 करोड़ जनधन महिला खाताधारकों को तीन महीने में 1,500 रुपये की नकद सहायता दी जाएगी।
वित मंत्री ने पैकेज की घोषणा करते हुए कहा कि जिन 8.3 करोड़ गरीब महिलाओं को रसोई गैस कनेक्शन दिया गया है उन्हें अगले तीन महीने तक मुफ्त भरा हुआ एलपीजी सिलेंडर दिया जाएगा। इसके अलावा गरीब वरिष्ठ नागरिकों, विधवाओं और दिव्यांगों को इस दौरान 1,000 रुपये की नकद राशि प्रति माह दी जायेगी।

उन्होंने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘लॉकडाउन बुधवार से लागू है और इसीलिए हम पैकेज लेकर आएं हैं जिसमें गरीबों, प्रभावित कर्मचारियों और उन लोगों की मदद के लिये उपायों की घोषणा की गई है जिन्हें तुरंत मदद की जरूरत है।’’
वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कोरोना वायरस से देश के 130 करोड़ लोगों को बचाने के लिये 21 दिन के बंद की घोषणा की हे। इस घोषणा के 36 घंटे के भीतर पैकेज की घोषणा की गयी है। ‘‘हम नहीं चाहते कि कोई भी भूखा रहे।’’
उन्होंने जरूरत पड़ने पर इसी प्रकार की और घोषणा किये जाने के संकेत दिये हैं।

सीतरमण ने कहा, ‘‘आज की घोषणा का का मकसद साफ है। इसका मकसद उन लोगों तक पैसा और खाना पहुंचाना है जिन्हें तुरंत इसकी जरूरत है। हम निश्चित रूप से अन्य चीजों के बारे में सोचेंगे। जरूरत पड़ी तो मैं और कदम उठाऊंगी।’’
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान योजना के अंतर्गत 8.69 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले सप्ताह में दो-दो हजार रुपये कि किस्त उनके खातों में डाल दी जाएगी। इस योजना के तहत लाभार्थियों को तीन समान किस्तों में साल में 6,000 रुपये दिये जाते हैं। इसके अलावा सरकार कर्मचारी भविष्य निधि के तहत उन छोटी कंपनियों के नियोक्ता और कर्मचारियों दोनों का योगदान देगी जहां 90 प्रतिशत कर्मचारियों का वेतन 15,000 रुपये से कम है।
सीतारमण ने कोरोना वायरस महामारी से संक्रमित लोगों के इलाज में जुटे डाक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के लिये 50 लाख रुपये के बीमा कवर की भी घोषणा की है।
गांव में काम करने वाले मजदूरों के लिये मनरेगा के तहत दैनिक मजदूरी 182 रुपये से बढ़कर 202 रुपये की गई है। पांच करोड़ परिवारों को इसका लाभ होगा।

इस घोषणा के साथ भारत अमेरिका और सिंगापुर जैसे देशों की कतार में आ गया है जिन्होंने कोरोनो वायरस माहमारी से निपटने के लिये प्रोत्साहन पैकेज लाने की घोषणा की है। इस महामारी में दुनिया भर में अब तक 5 लाख लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि 21,000 लोगों की मौत हुई है।
भारत में अब तक इस वायरस से 649 लोग संक्रमित हैं जबकि 13 लोगों की मौत हो गयी है।

तीन महीने तक गरीब परिवारों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराने में जहां सरकारी खजाने पर 45,000 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा वहीं 8.7 करोड़ किसानों को 2,000 रुपये उपलब्ध कराने पर 16,000 करोड़ रुपये व्यय होंगे।

वित्त मंत्रालय के अनुसार महिला जनधन खाताधारकों के खाते में 500 रुपये महीना नकद राशि डालने से 31,000 करोड़ रुपये और मुफ्त सिलेंडर देने पर 13,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
हालांकि, सीतारमण ने इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया कि सरकार कैसे पैकेज की राशि का वित्त पोषण करेगी। देश में कामकाज ठप होने का असर अगले कुछ महीनों तक दिखेगा और उसका कर संग्रह पर भी असर पड़ेगा जो पहले से ही दबाव में है।

उन्होंने इस बारे में भी कुछ नहीं कहा कि क्या सरकार इसके लिये राजकोषीय घाटे में ढील देगी या फिर अतिरिक्त कर्ज लेगी।

सरकार का संशोधित राजकोषीय घाटा चालू वित्त वर्ष में 3.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। अगले वित्त वर्ष में सरकार ने राजस्व और व्यय का अंतर राजकोषीय घाटा 3.5 प्रतिशत रहने का अनुमान रखा है।
उन्होंने कहा, ‘‘आज के उपायों का मकसद गरीबों तक मदद पहुंचाना है.. इस समय मैं जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाने को लेकर ज्यादा चिंतित हूं।’’
‘लॉकडाउन’ के दौरान बंद उद्योग धंधों की मदद के लिये सरकार कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों के भविष्य निधि में अगले तीन महीने तक योगदान देगी। यह उन इकाइयों पर लागू होगा जहां कर्मचारियों की संख्या 100 तक है और 90 प्रतिशत कर्मचारियों को 15,000 से अधिक कमाई नहीं है। इस प्रकार, योगदान वेतन का 24 प्रतिशत होगा।

वित्त मंत्री ने कहा कि साथ ही कर्मचारियों को भविष्य निधि से 75 प्रतिशत (जिसे लौटाना नहीं होगा) या तीन महीने के वेतन, जो भी कम हो, निकालने की अनुमति होगी।

भवन निर्माण अथवा दूसरे निर्माण कार्यों में काम करने वाले मजदूरों के लिये केन्द्रीय कानून के तहत एक कल्याण कोष बनाया गया है। इसमें 3.5 करोड़ मजदूर पंजीकृत हैं। राज्य सरकारों को इस कोष के इस्तेमाल के लिये निर्देश दिया जायेगा। उन्हें कहा जायेगा कि कोष से वह इन मजदूरों को सहायता और समर्थन दें ताकि उन्हें आर्थिक तंगी से नहीं गुजरना पड़े।
मुफ्त अनाज और दाल राशन की दुकानों से मिलने वाले मौजूदा खाद्यान्न के अलावा होगा। राशन कार्डधारक अनाज और दाल राशन की दुकानों से दो किस्तों में ले सकते हैं।

वित्त मंत्री के साथ इस अवसर पर वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर तथा वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकारों को जिला खनिज कोष (डीएमएफ) के तहत उपलब्ध राशि का कोरोना वायरस के लिये चिकित्सा परीक्षण, संक्रमित व्यक्तियों के इलाज और इसके प्रसार को रोकने के लिये दूसरी जरूरतों को पूरा करने में किया जा सकता है।
इस बारे में डैलायॅट इंडिया के भागीदार अनिल तलरेजा ने कहा कि इस घोषणा से आबादी के बड़े हिस्से को राहत मिलेगी। ‘‘इससे सुनिश्चित होगा कि गरीब और जरूरतमंदों को जो चाहिए, उन्हें वह मिलेगा। यह सुनिश्चित किया गया है कि किसान, गरीब वरिष्ठ नागरिक, विधवाओं के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोग जो मेहतन कर रहे हैं, उन्हें पुरष्कृत किया जाए।’’


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PTI News Agency

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