‘केदारनाथ’ का जबर्दस्त विरोध शुरू, फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग

मुंबईः निर्माता एवं निर्देशक अभिषेक कपूर की फिल्म ‘केदारनाथ’ को लेकर उत्तराखंड में जबर्दस्त विरोध शुरू हो गया है। फिल्म को लेकर जहां जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं वहीं साधु संत इसे हिन्दू आस्था के खिलाफ बता रहे हैं। उच्च न्यायालय में इसको लेकर बुधवार को एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसकी सुनवाई गुरुवार को होगी। दूसरी ओर सरकार भी इस मामले को लेकर गंभीर हो गयी है। सरकार ने इस मामले को लेकर एक समिति का गठन किया है। सरकार समिति की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करेगी।
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साधु संत फिल्म की कहानी को लेकर विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि मोक्ष के धाम केदारनाथ को जिस तरह प्यार के धाम के रूप में दर्शाया गया है, साधु संत उससे उद्वेलित हैं। स्वामी दर्शन भारती उर्फ देवेन्द्र सिंह पंवार व अन्य की ओर से इस मामले को आज उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। केदारनाथ हिन्दुओं की आस्था का केन्द्र है और भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से वह प्रमुख ज्योतिर्लिंग हैं। केदारनाथ को मोझ का धाम माना जाता है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया है कि फिल्म में केदारनाथ के इतिहास को गलत ढंग से पेश किया गया है और इससे सीधे-सीधे उत्तराखंड ही नहीं देश व दुनिया के लोगों की आस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। याचिका में कहा गया है कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म में दिखाए गए इन तथ्यों की अनदेखी की है। फिल्म में केदारनाथ को प्यार का धाम बताया गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से आगे कहा गया है कि फिल्म देश ही नहीं दुनिया में केदारनाथ को लेकर गलत संदेश प्रस्तुत कर रही है। इसके साथ ही फिल्म में वर्ष 2013 में आई भीषण प्राकृतिक आपदा को लेकर भी गलत तथ्य पेश किए गए हैं। यह केदारनाथ जैसे पवित्र धाम के खिलाफ है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म के प्रदर्शन से देश के विभिन्न हिस्सों में दंगे भड़क सकते हैं। याचिकाकर्ता की ओर से इसे संविधान की धारा 21 व 25 के विरूद्ध बताया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से सात दिसंबर को प्रदर्शित होने वाली फिल्म केदारनाथ को वर्तमान स्वरूप में प्रदर्शित करने पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गयी है। दूसरी ओर फिल्म के प्रदर्शन को लेकर हिन्दू संगठनों में विरोध है। हिन्दू जागरण मंच ने आज जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर सरकार से फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। प्रदेश में अन्य जगहों से भी फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की जा रही है।

याचिकाकर्ता की ओर से केन्द्र सरकार, फिल्म सेंसर बोर्ड, राज्य सरकार व प्रदेश के पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी को पक्षकार बनाया गया है। राज्य की त्रिवेन्द्र रावत सरकार भी इस मामले को लेकर सक्रिय हो गयी है। सरकार ने आज फिल्म पर होने वाली आपत्तियों की समीक्षा के लिये पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। इस समिति में गृह सचिव नितेश झा, सूचना सचिव दिलीप जावलकर व प्रदेश के डीजीपी को बतौर सदस्य शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि समिति केदारनाथ फिल्म को लेकर प्रस्तुत की गई आपत्तियों की जांच करेगी और सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। कमेटी की रिपोर्ट के बाद सरकार फिल्म के रिलीज को लेकर निर्णय लेगी।

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