गुरु का वृश्चिक में गोचर, जानें किसके खोलेगा भाग्य

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ज्योतिषीय दृष्टिकोण से साल 2018 का सबसे बड़ा परिवर्तन गुरुवार दिनांक 11.10.2018 को हो गया है। देवगुरु बृहस्पति अपने शत्रु शुक्र की राशि तुला को त्याग कर अपने मित्र मंगल की राशि वृश्चिक में आ गए हैं। भारतीय समयनुसार देवगुरु बृहस्पति गुरुवार दिनांक 11.10.2018 को रात 8:39 बजे तुला राशि को छोड़कर वृश्चिक राशि में प्रवेश कर गए हैं और शनिवार दिनांक 30.03.2019 रात 3:11 बजे तक इसी राशि में स्थित रहेंगे। गुरु ग्रह संतान, धन, जीवनसाथी व सुख का कारक है। अतः गुरु के राशि परिवर्तन से व्यक्ति के जीवन में बहुत असर पड़ता है। यह परिवर्तन बहुत लोगों के लिए लाभकारी व बहुत लोगों के लिए परेशानी का सबब बनेगा। आइए जानते हैं गुरु के गोचर का सभी राशियों पर क्या असर डलेगा।


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मेष: नवम व द्वादश के स्वामी गुरु के अष्टम में आने से यह परिवर्तन लाभकारी नहीं रहेगा। भाग्य का साथ नहीं मिलेगा। दुर्भाग्य की वजह से असफलताएं मिल सकती हैं धन हानि भी हो सकती है। आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। 

वृष: अष्टम व एकादश के स्वामी गुरु के सप्तम में आने से दाम्पत्य जीवन मधुर रहेगा व जीवनसाथी की ओर से खुशियां मिलेंगी। जीवनसाथी की भावनाओं की कद्र करें। व्यावसायिक साझेदारी से लाभ होगा। पार्टनर की मदद से लाभ मिलेगा।

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मिथुन: सप्तम व दशम के स्वामी गुरु के छठे भाव में आने से शत्रु परेशान करेंगे। भाई-बहनों से मतभेद हो सकते हैं। लंबी बीमारी के योग हैं। सफलता के लिए आपको संघर्ष करना पड़ेगा। प्रोफेशनल लाइफ में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
 

कर्क: षष्ठम व नवम के स्वामी गुरु के पंचम भाव में आने से संतान सुख की प्राप्ति हो सकती है। सरकारी विभाग या प्राधिकरण से लाभ मिलने की संभावना है। अच्छे लोगों की संगत मिलेगी। प्रबुद्ध व्यक्तियों से आपका मेल-जोल बढ़ेगा।

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सिंह: पंचम व अष्टम के स्वामी गुरु के चतुर्थ भाव में आने से मित्र के साथ मतभेद हो सकते हैं। सामाजिक अपमान के योग हैं। घर में शुभ कार्य संपन्न हो सकते हैं। वाहन से दुर्घटना के योग हैं। माता का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।


कन्या: चतुर्थ व सप्तम के स्वामी गुरु के तृतीय भाव में आने से व्यवसाय में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। बिजनेस में निवेश करने से बचें। लापरवाही के कारण प्रमोशन रुक सकता है। ऑफिस में बेकार की बातें करने से बचें।
 

तुला: तृतीय व षष्ठम के स्वामी गुरु के द्वितीय भाव में आने से धन संचय व लाभ की प्राप्ति होगी। निवेश की संभावना बनेगी। पारिवारिक जीवन में शांति रहेगी। आपके व्यक्तित्व से लोग प्रभावित होंगे। प्रोफेशनल लाइफ शानदार रहेगी।

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वृश्चिक: द्वितीय व पंचम के स्वामी गुरु के लग्न में आने से कष्ट हो सकते हैं। चुनौतियों व परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। काम के सिलसिले में घर से दूर जाना पड़ सकता है। बेवजह के खर्च करने से बचें। लेन-देन में सावधानी बरतें।


धनु: लग्न व चतुर्थ के स्वामी गुरु के द्वादश भाव में आने से मानसिक तनाव बढ़ेगा। धैर्य और संयम के साथ काम लें। प्रॉपर्टी को लेकर भी कोई विवाद हो सकता है। धन हानि से परेशान रहेंगे। पैसों के लेन-देन में सतर्क रहें व निवेश से बचें। 

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मकर: द्वादश व तृतीय के स्वामी गुरु के एकादश भाव में आने से प्रोफेशनल लाइफ में उन्नति होगी। व्यवसाय में बेहतर परिणाम मिलेंगे। कार्यस्थल पर पदोन्नति की संभावना है। आध्यात्म में रुझान बढ़ेगा।


कुंभ: एकादश व द्वितीय के स्वामी गुरु के दशम में आने से नौकरी व व्यवसाय के लिए अशुभता रहेगी। सहकर्मी व अधिकारियों में मतभेद हो सकते हैं। सेहत प्रभावित हो सकती है। इच्छा शक्ति में कमी आएगी और मानसिक तनाव रहेगा।


मीन: लग्न व दशम के स्वामी गुरु के नवम भाव में आने से स्थिति लाभकारी सिद्ध होगी। कार्यक्षेत्र में तरक्की होगी। सैलरी में बढ़ोत्तरी मिल सकती है। प्रोफेशनल लाइफ में बढ़ोत्तरी होगी। आध्यात्मिक कार्यों में रुचि आपकी लोकप्रियता में वृद्धि करेगी। 

आचार्य कमल नंदलाल
ईमेल: kamal.nandlal@gmail.com

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