मोदी-शाह के चक्रव्यूह में उलझती कांग्रेस

नेशनल डेस्कः (मनीष शर्मा) जो तुमको हो पसंद वही बात करेंगे। लग रहा है कांग्रेस का रवैया भी बीजेपी के लिए ऐसा ही है। बीजेपी को जिन मुद्दों से खतरा है वो हैं नोटबंदी, रूपये की गिरती वैल्यू और पेट्रोल-डीज़ल के बढ़ते दाम। इन मुद्दों को लेकर बीजेपी बैकफुट पर है। कांग्रेस को चाहिए था कि इन मुद्दों पर अपनी पूरी ताकत झोंके लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के जाल में उलझकर यह वही मुद्दे उठा रही है जिसका अंत में फायदा बीजेपी को मिलेगा और साख कांग्रेस की गिरेगी।

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विजय माल्या की अरुण जेटली से मुलाकात
भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या ने वित्तमंत्री अरुण जेटली पर आरोप लगाया है कि देश छोड़ने पहले वह उनसे मिलकर आया था। इस दावे के बाद कांग्रेस का जेटली पर हमला करना स्वाभाविक था। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने वित्तमंत्री से इस्तीफे की मांग कर डाली है और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पीएल पुनिया ने दावा किया है कि उन्होंने जेटली और माल्या को संसद के सेंट्रल हाल में आपस में बातचीत करते हुए देखा था। अब कांग्रेस को कौन समझाए कि जब विजय माल्या देश से भागा था तो वह राज्यसभा सांसद था। सांसद होने के नाते उसे प्रधानमंत्री तक से भी मिलने की छूट थी। ऐसी मुलाकात पर सवाल उठाना बेवकूफी ही होगी।

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राफेल का घोटाला
कांग्रेस बीजेपी सरकार द्वारा 36 राफेल एयरक्राफ्ट की डील को घोटाले का रंग दे रही है। कांग्रेस का आरोप है कि जो एयरक्राफ्ट यूपीए के कॉन्ट्रैक्ट में 526 करोड़ का मिल रहा था वह अब एनडीए के कॉन्ट्रैक्ट में 1670 करोड़ में मिल रहा है। इसमें घोटाला हुआ है या नहीं इसकी जांच तो कैग की रिपोर्ट के आने के बाद ही पता चल पाएगी लेकिन बीजेपी ने इस मुद्दे को इस तरह से मोड़ दिया है कि लोगों के पास यह सन्देश चला जाए कि कांग्रेस राफेल डील के खिलाफ है।

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बैंकों का बढ़ता एनपीए
नॉन परफार्मिंग एसेट्स (एनपीए ) मतलब बैंकों द्वारा दिया गया वह कर्ज, जिसके वापस मिलने की उम्मीद न के बराबर होती है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार पर जोर शोर से हमला किया था लेकिन कुछ दिन पहले आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने संसदीय समिति को दिए जवाब में कहा कि सबसे अधिक बेड लोन तत्कालीन मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए के समय 2006-2008 के बीच दिया गया।

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एनआरसी का मुद्दा
साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर असम में नागरिकों के सत्यापन का कार्य शुरू किया गया और 2018 जुलाई में फाइनल ड्राफ्ट पेश किया गया। लेकिन ड्राफ्ट में चालीस लाख लोगों के नाम गायब होने से केंद्र की राजनीति गरमा गई। इसका सबसे ज़्यादा विरोध ममता बनर्जी ने किया। मानसून सेशन में कांग्रेस, टीएमसी और अन्य विपक्षी पार्टियों ने इस ड्राफ्ट को लेकर संसद में बहुत हंगामा किया। लेकिन बाद में कांग्रेस इस मुद्दे पर बैकफुट पर आ गई जब बीजेपी देश को समझाने में कामयाब हो गई की यह ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में ही तैयार हुआ था और जो इस ड्राफ्ट का विरोध कर रहे हैं वो घुसपैठियों के शुभचिंतक हैँ।

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ईवीएम से छेड़छाड़
कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टी का आरोप है कि बीजेपी की लगातार हो रही जीतों का कारण ईवीएम हो रही गड़बड़ी है। लेकिन मई 2017 में चुनाव आयोग ने जब सभी पार्टियों को चैलेंज किया, कि वो 3 जून को ईवीएम टेम्पर करके दिखाएं तो कांग्रेस सहित किसी भी पार्टी की हिम्मत नहीं हुई, कि इस चैलेंज को स्वीकार कर सके। काँग्रेस जनता को यह भी समझाने में नाकाम रही कि अगर बीजेपी ईवीएम में गड़बड़ी कर रही थी तो पंजाब, गोवा और कर्नाटक के चुनावों में उसका प्रदर्शन कैसे अच्छा रहा?

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सर्जिकल स्ट्राइक पर हाय-तौबा
28-29 सितंबर, 2016 की रात भारतीय सेना ने पाक के कब्जे वाले कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक किया । सेना ने इसकी जानकारी जनता को प्रेस कॉन्फ्रेंस के द्वारा दी। जिस समय देश गौरवनित अनुभव कर रहा था उस समय कांग्रेस इस पर हाय-तौबा मचा रही थी। राहुल गाँधी इसे खून की दलाली कह रहे थे लेकिन संजय निरुपम ने तो इसे फर्जी तक करार दे दिया था। सरकार का विरोध करते-करते कांग्रेस ने सेना पर ही सवाल खड़े कर दिए।

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अगले साल लोकसभा चुनाव में ऊपर लिखे मुद्दे कांग्रेस के लिए सेल्फ गोल साबित होंगे। नोटबंदी बीजेपी सरकार का सबसे बड़ा फेलयर है। लाखों लोगों की नौकरी जा चुकी है। जीडीपी 2 फीसदी से ज़्यादा गिर गया। 100 से ज़्यादा लोगों की मौत नोटबंदी के कारण हुई। 21000 करोड़ रूपये नए नोट बनाने में खर्च हो गए। काला धन वापस नहीं आया। पेट्रोल 90 के पार पहुँच गया है और रुपया हर दिन गिरता जा रहा है। कांग्रेस और विपक्ष को चाहिए कि वह रायता फ़ैलाने की बजाय इन तीन मुद्दों पर ही ध्यान केंद्रित करे।

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