ई-फॉर्मेसी के खिलाफ कैमिस्ट 28 सितम्बर को रखेंगे बंद

चंडीगढ़(पाल) :दवा विक्रेताओं व वितरकों के सबसे बड़े संगठन ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ कैमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट (ए.आइ.ओ.सी.डी.) ने दवाइयों की ऑनलाइन बिक्री के विरोध की घोषणा की है। केंद्र सरकार द्वारा भारत में इंटरनैट के जरिए दवाइयों की बिक्री करने या किसी भी रूप में ई-फार्मेसी चलाने की अनुमति देने के किसी भी कदम का प्रतिवाद करने के लिए 28 सितम्बर को एक दिवसीय अखिल भारतीय कैमिस्ट बंद का ऐलान किया गया है। 

ए.आइ.ओ.सी.डी. के प्रैजीडैंट जे.एस. शिंदे के मुताबिक अगर दवाइयों की ऑनलाइन बिक्री की इजाजत दी जाती है तो इससे सिर्फ इसके सदस्यों के कॉमर्शियल बिजनैस का नुक्सान ही नहीं होगा बल्कि लोगों के लिए भी खतरनाक होगा। 

उन्होंने बताया कि ए.आइ.ओ.सी.डी. ने केंद्र सरकार सहित कई विभागों इसे रोकने के लिए बार-बार अनुरोध किया है। इसी को लेकर नियमानुसार 8 घंटे काम करने और दो बार एकदिवसीय अखिल भारतीय कैमिस्ट बंद भी किया गया है। 

एक्ट की अनदेखी :
-ऑनलाइन कंपनियां एक्ट के तहत बिना जवाबदेही के चल रही हैं और प्रिस्क्रिप्शन की सत्यता को प्रमाणित किए बिना ऑर्डर्स पास कर रही हैं
-एम.टी.पी. किट्स, सिल्डेनािफल, टाडालाफिल जैसी दवाइयां, कोडीन जैसी लत डालने वाली दवाइयां आर.एम.पी. के प्रिस्क्रिप्शन के बगैर बेची जा रही हैं
-अनुसूचित दवाइयां जिन्हें गायनीकोलॉजिस्ट, साइकैट्रिस्ट आदि जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों के प्रिस्क्रिप्शन पर ही सप्लाई करना होता है,या तो सीधे या अयोग्य प्रैक्टीशनर्स के जरिए सप्लाई किया जा रहा है
-दवाइयों को पुराने या छेड़छाड़ किए गए प्रिस्क्रिप्शन पर बेचा जा रहा है
-हर प्रिस्क्रिप्शन पर कमीशन पाने केलिए मरीजों की जांच किए बगैर ही फर्जी ई-प्रिस्क्रिप्शन जेनरेट किया जा रहा है
-ऑनलाइन कंपनियां खुलेआम प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एड दे रही हैं जो ड्रग एक्ट की धारा 18 (सी) के प्रावधानों का उल्लंघन है। इसमें एक वैध लाइसेंस के बगैर कोई भी दवा बेचना या उसका वितरण या स्टॉक करना या उसे प्रदर्शित करना अथवा बिक्री के लिए पेशकश करना प्रतिबंधित किया गया है।


 

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