BJP चार्जशीट पर जयराम सरकार ने लिया कड़ा संज्ञान, सभी विभागों को दिए ये निर्देश

शिमला (राक्टा):भाजपा द्वारा विपक्ष में रहते पूर्व वीरभद्र सिंह सरकार के खिलाफ  तैयार की गई चार्जशीट पर प्रदेश की अफसरशाही खासकर विभागों की बेरुखी का जयराम सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। इसी कड़ी में सरकार के निर्देशों पर वीरवार को मुख्य सचिव विनित चौधरी ने अधिकारियों के साथ बैठक की और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए। सूचना के अनुसार बैठक में 20 से अधिक विभागीय अफसर और प्रशासनिक सचिव शामिल हुए। सूत्रों के अनुसार बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी विभाग चार्जशीट में शामिल अपने विभागों से जुड़े मामलों पर एक सप्ताह के भीतर कमैंट्स देंगे। इसके तहत बताना होगा कि चार्जशीट के तहत जो आरोप लगाए हैं, उनके बारे में संबंधित विभाग का क्या कहना है। सूत्रों के अनुसार एक सप्ताह बाद चार्जशीट को लेकर फिर बैठक होगी और उसमें विभागीय कमेंट्स के आधार पर चार्जशीट में शामिल मामलों को जांच के लिए स्टेट विजीलैंस को सौंपने पर निर्णय लिया जाएगा। इस प्रक्रिया में डायरैक्टर विजीलैंस नोडल ऑफिसर होंगे और विभागों तथा एजैंसी के बीच जी.ए.डी. को-आर्डीनेटर करेगा।  इससे पहले इस तरह की बैठक हो चुकी है।


ये तो जांच एजैंसी ही देखेगी
सूत्रों के अनुसार बैठक में एक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उनके विभागीय अधिकारियों ने पड़ताल के बाद कहा है कि चार्जशीट में उनके विभाग से जुड़े आरोपों को लेकर कोई केस नहीं बनता है। सूत्रों के अनुसार इस पर मुख्य सचिव ने कहा कि सभी विभाग रिकार्ड में अपने कमैंट्स दें ताकि उस आधार पर आगामी कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा कि केस बनता है या नहीं, यह तो जांच एजैंसी को देखना है। 


बी.के. अग्रवाल नहीं रहे मौजूद
अतिरिक्त मुख्य सचिव बी.के. अग्रवाल प्रदेश से बाहर होने के चलते बैठक में भाग नहीं ले पाए। सूत्रों के अनुसार पहले से प्रस्तावित बैठक में उनकी अनुपस्थिति का संज्ञान लिया गया है। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डा. श्रीकांत बाल्दी सहित सभी वरिष्ठ प्रशासनिक सचिव मौजूद थे।


75 पन्नों की चार्जशीट में कई आरोप
भाजपा ने पूर्व कांग्रेस सरकार के समय 24 दिसम्बर, 2016 को राज्यपाल को एक चार्जशीट सौंपी थी। 75 पन्नों की चार्जशीट में पूर्व सी.एम. वीरभद्र सिंह सहित उनके मंत्रिमंडल के अधिकांश सदस्यों और अधिकारियों के खिलाफ  गंभीर आरोप लगाए गए थे। भाजपा की इस चार्जशीट में केवल 2 मंत्रियों स्व. कर्ण सिंह और धनीराम शांडिल के खिलाफ  ही कोई आरोप नहीं था।

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