हिमाचल-पंजाब बॉर्डर पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, 3 स्टोन क्रशर सीज-मशीनरी जब्त

ऊना (सुरेन्द्र):हिमाचल-पंजाब बॉर्डर पर पंजाब केसरी द्वारा उजागर किए गए खनन के खुलासे से हड़कंप मच गया है। मामला प्रकाश में आते ही हरकत में आए जिला प्रशासन ने 3 स्टोन क्रशरों को सील कर दिया है। यही नहीं, 3 जे.सी.बी. और पोकलेन मशीनों को जब्त किया गया है जबकि बॉर्डर एरिया पर जननी सहित आसपास के तमाम क्षेत्र में आगामी आदेशों तक खनन गतिविधियों पर पूर्णत: रोक लगा दी गई है। वीरवार सुबह डी.सी., एस.पी., माइनिंग आफिसर डी.एस.पी. हरोली सहित पूरा प्रशासनिक अमला हकीकत जानने के लिए मौके पर पहुंचा। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी पाया कि बड़े स्तर पर खनन नियमों की अवहेलना हुई है। पूरा दिन अवैध खनन के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई जारी रही। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र की निशानदेही के भी आदेश जारी कर दिए हैं। जिन भूमि मालिकों ने बिना अनुमति अपने क्षेत्र लीज पर खनन के लिए दिए हैं और बिना किसी परमिशन के जहां खनन पाया जाएगा उन भूमि मालिकों के खिलाफ केस दर्ज करने का भी फैसला किया है।
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सुबह 11 से शाम 6 बजे तक चली प्रशासन की कार्रवाई
अवैध खनन का मामला पंजाब केसरी द्वारा उजागर करने के बाद प्रशासन की कार्रवाई आज सुबह 11 बजे से शुरू हुई जो सायं 6 बजे तक चलती रही। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी माना कि बड़े स्तर पर बॉर्डर एरिया में नियमों की अवहेलना हो रही है। वीरवार को जिला प्रशासन की तरफ से डी.सी. राकेश कुमार प्रजापति, एस.पी. दिवाकर शर्मा, खनन अधिकारी कुलभूषण शर्मा व डी.एस.पी. हरोली कुलविन्द्र सिंह ने हरोली क्षेत्र जननी, कुठारबीत तथा पोलियां बीत में किए गए औचक निरीक्षण के दौरान खनन गतिविधियों में लगे स्टोन क्रशर की जांच की। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने पाया कि क्षेत्र में काम कर रही जे.सी.बी. और पोकलेन मशीनों पर न तो नम्बर थे और न ही उन पर किसी प्रकार का विवरण मौजूद था कि यह मशीनरी किसकी है और कौन इसे संचालित कर रहा है। डी.सी. ने निर्देश जारी किए हैं कि कोई भी मशीनरी बिना किसी विवरण के यहां नहीं चल सकेगी। हर मशीन पर टैलीफोन नम्बर सहित मालिक का नाम दर्ज करना आवश्यक होगा। इससे अवैध खनन करने पर पकड़े जाने के दौरान मालिक के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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2 सप्ताह में निशानदेही पूरी करने के दिए निर्देश
डी.सी. राकेश कुमार प्रजापति ने कहा कि प्रशासन ने बड़े स्तर पर अनियमितताएं पाए जाने के बाद 3 स्टोन क्रशरों को सीज कर दिया है। उन्होंने बताया कि जिन 3 क्रशरों को सीज किया गया है उनमें आर.एस. ग्रिट कुठारबीत, डा. लखविंद्र सिंह स्टोन क्रशर पोलियां बीत तथा आर.एस. स्टोन क्रशर गौंदपुर बूला शामिल हैं। उन्होंने कहा कि माइनिंग वाले क्षेत्रों की निशानदेही के लिए संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार, नायब तहसीलदार तथा पुलिस अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश देते हुए इसे 2 सप्ताह के भीतर पूरा करने के लिए कहा गया है।
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क्यों दी जाती है प्रकृति से खिलवाड़ करने की अनुमति?
एक तरफ प्रकृति को बचाने की जद्दोजहद चल रही है तो दूसरी तरफ खनन माफिया पहाडिय़ों और खड्डों को तहस-नहस करने पर डटा हुआ है। सवाल उन संस्थाओं पर भी है जो खनन के लिए लीज जारी करता है। आखिर प्रकृति से खिलवाड़ करने की अनुमति क्यों दी जाती है। जहां हजारों पेड़ और वनस्पतियां मौजूद हैं वहां पर जे.सी.बी. मशीनें चलाने की परमिशन ही क्यों दी जाती है। हालांकि इसके लिए कड़े नियम हैं। समितियां भी हैं लेकिन सवाल समितियों की सिफारिशों पर भी खड़े हो रहे हैं।
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