अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर बुरी खबर, खुदरा महंगाई दर 4.87 से बढ़कर 5% हुई

नई दिल्ली:  ईंधन तथा आवास महंगे होने से जून में उपभोक्ता मूल्य आधारित मुद्रास्फीति की दर यानी खुदरा महंगाई बढ़कर 5 प्रतिशत पर पहुंच गयी। खुदरा महंगाई लगातार तीसरे महीने बढ़ी है और यह इसका इस साल जनवरी (5.07 प्रतिशत) के बाद का उच्चतम स्तर है। 
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खास बात यह है कि खाद्य पदार्थों की महंगाई दर में कमी के बावजूद जून में इसका ग्राफ ऊपर गया है जो सरकार के लिए चिंता की बात हो सकती है। खाद्य खुदरा महंगाई दर 2.91 प्रतिशत दर्ज की गयी है जो मई में 3.10 प्रतिशत रही थी। पिछले साल जून में सामान्य खुदरा महंगाई दर 1.46 प्रतिशत और इस साल मई में 4.87 प्रतिशत रही थी। 

PunjabKesariकेंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा आज जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल जून की तुलना में इस साल जून में आवास 8.45 प्रतिशत महंगे हुये। ईंधन तथा बिजली खंड की महंगाई दर 7.14 प्रतिशत रही। मुख्य रूप से एक साल पहले की तुलना में पेट्रोल तथा डीजल की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण इस खंड की महँगाई दर ज्यादा रही है। 
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बता दें कि अर्थव्यवस्था पर महंगाई का असर दो तरह से होता है। महंगाई दर बढ़ने से बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं और लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो जाती है। महंगाई दर घटती है तो खरीदने की क्षमता बढ़ जाती है, जिससे बाजार में नगदी की आवक भी बढ़ जाती है। महंगाई बढ़ने और घटने का असर सरकारी नीतियों पर भी पड़ता है। रिजर्व बैंक ब्याज दरों की समीक्षा में खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखता है। महंगाई पर चिंता जताते हुए आरबीआई ने 6 जून की समीक्षा बैठक में रेपो रेट 0.25% बढ़ाने का फैसला लिया था।

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