ईद की तैयारियां होने लगी शुरू, हर तरफ बिखरेगी सेवंईयों की महक

सब्र और इबादत से पुरनूर रमजान का महीना खत्म होने की दस्तक के साथ ही मीठी ईद पर तरह-तरह के पकवान और खास तौर पर सेवंई बनाने की तैयारियां पूरे शबाब पर हैं और लोग कपड़ों से लेकर सेवंई, मेवे, खोया खरीदने के लिए बाजारों का रूख कर रहे हैं। ईद उल फितर के मौके पर हर घर में लजीज शीर खुरमा बनाने की रवायत है। लोग नाते रिश्तेदारों के यहां ईद की मुबारक देने जाते हैं तो अन्य पकवानों के साथ मीठी सेवंई परोसी जाती है। दूध को घंटों उबालकर मेवों के साथ बनाई जाने वाली यह सेवइयां ईद की मिठास को और भी बढ़ा देती हैं।  

    

रोजेदारों को तो ईद के चांद का इंतजार होता ही है, रमजान की आखिरी रात डेयरी वाले भी आसमान की तरफ टकटकी लगाए रहते हैं क्योंकि चांद रात पर दूध की खपत लगभग दोगुनी हो जाती है और उन्हें इसके लिए पहले से तैयारी रखनी पड़ती है। पुरानी दिल्ली में रहने वाले मो नईम का कहना है कि आज चांद रात होने की पूरी संभावना है। इसलिए दूध और सेवईं खरीदने के लिए चांद के दीदार का इंतजार करना अक्लमंदी नहीं है क्योंकि चांद दिखने के बाद दुकानों पर भीड़ बहुत बढ़ जाती है।  

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उन्होंने कहा कि उन्होंने शाम में चांद दिखने से पहले ही ईद पर शीर-खुरमा बनाने के लिए सामान खरीदने का फैसला किया है।  गौरतलब है कि गुरूवार को चांद दिख जाता है तो शुक्रवार को ईद होगी। अगर ऐसा नहीं होता है फिर शनिवार को ईद का त्यौहार मनाया जाएगा। मुस्तकीम बताते हैं कि चांद दिखने के बाद सेवई और दूध खरीदने के लिए बाजार का रूख करने का नुकसान यह भी होता है कि कई बार डेयरियों पर दूध खत्म हो जाता है। इससे ईद पर सेवईं बनाने की योजना खटाई में पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि अगर आज चांद नहीं हुआ तो दूध को फ्रिजर में रख देंगे, जिससे वह खराब नहीं हो। शुक्रवार को ईद नहीं होने पर शनिवार को तो ईद का त्यौहार मनाया जाना ही है। 
  

रजमान के महीने में 29 या 30 रोजे होते हैं। इनकी संख्या चांद दिखने के आधार पर तय होती है। अधिकतर लोगों के लिए गुरूवार को 29वां रोजा है इसलिए आज रात चांद दिखने की संभावना है। दरिया गंज की मदर डेयरी के संचालक उपेंद्र ने बताया कि ईद के मद्देनजर उन्होंने 900 लीटर दूध मंगवाया है। वैसे आम दिनों में 550 लीटर ही दूध मंगवाते हैं।      


इसी इलाके के माजिद दूध भंडार के फैजान बताते हैं कि चांद रात को दूध की खरीद दोगुनी हो जाती है। जो शख्स आमतौर पर एक या दो लीटर दूध खरीदता है, वह ईद की वजह से चार-पांच लीटर दूध लेता है। उन्होंने बताया कि हमारी डेयरी पर रोजाना करीब 300-400 लीटर दूध की खपत होती है, मगर ईद पर यह खपत लगभग दोगुनी होकर 800 लीटर हो जाती है। हमने आज के लिए 800 लीटर दूध लाने का ऑर्डर दिया है। यही हाल मुस्लिम इलाके की कमोबेश हर डेयरी का है। उधर, चितली कब्र इलाके में सेवंई के दुकानदार उवेज जावेद खान ने बताया कि बाजार में कई तरह की सेवइयां पसंद की जाती है, लेकिन सबसे ज्यादा मांग बनारसी सेवंई की है। यह मशीन से तैयार की जाती है और एकदम महीन होती हैं। इसे आम तौर पर उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले लोग लेना पसंद करते हैं। इसे बनारसी छत्ता कहते हैं।  

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उन्होंने कहा कि रूमाली सेंवई और बारीक सेवंई की भी मांग है। यह सीक की तरह बारीक और लंबी होती है। इसे दिल्ली के रहने वाले लोग ज्यादा पसंद करते हैं। खान ने बताया कि ईद पर फेहनी बहुत कम लोग खरीदते हैं, क्योंकि रमजान में ज्यादातर लोग सहरी में इसे दूध में डालकर खाना पसंद करते हैं।