कर्नाटक फैसला: भारतीय न्यायिक इतिहास में दूसरी बार आधी रात को खुले SC के दरवाजे

नई दिल्ली: कर्नाटक विधानसभा में चुनावी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। चुनावी नतीजों ने राज्य में सियासी पारा एक बार फिर चढ़ा दिया है। बीजेपी को 104 और कांग्रेस+जेडीएस को 78+38 (116)। इसी बीच कर्नाटक के राज्यपाल वीजू भाई वाला ने बीजेपी को सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते सरकार बनाने का न्यौता दे दिया और बीजेपी को बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय ले लिया। आज बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार येदुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ले ली। लेकिन कल रात  कर्नाटक की सियासत में जमकर हंगामा हुआ।
PunjabKesariपहले भी रात में खुल चुके है सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे
राज्यपाल के फैसले का विरोध करते हुए कल रात कांग्रेस और जेडीएस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और बीजेपी को सरकार बनाने से रोकने ते लिए तत्काल सुनवाई करने की अपील की। इसके लिए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने तीन जज जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस बोबड़े की बेंच गठित कर सुनवाई का आदेश दिया। ऐसा पहली बार नहीं है जब आधी रात को सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खुले गए हो।कांग्रेस और जेडीएस की अपील पर कोर्ट ने देर रात 1 बजकर 45 मिनट पर सुनवाई की। कोर्ट में कांग्र्स और जेडीएस की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी तो वहीं भाजपा का पक्ष रखने के लिए पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी मौजूद थे। भारतीय न्यायिक इतिहास में ऐसा दूसरी बार है जब किसी मामले की सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खुला। 
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दीपक मिश्रा ने किया था याकूब मेमन को फांसी देने का फैसला
इससे साल 1993 में मुंबई में सीरियल बम ब्लास्ट मामले में आधी रात को आरोपी याकूब मेमन की फांसी पर रोक संबंधी अपील पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खुला था। 2015 में 29 जुलाई की रात याकूब मेनन को फांसी से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में वकील दलीले पेश कर रहे थे। 30 जुलाई 2015 को सुबह नागपुर सेंट्रल जेल में फांसी की तैयारी चल रही थी। तब वर्तमान चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने याकूब मेमन को फांसी देने का फैसला कर दिया था।
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