गन्ना किसानों पर भड़कीं मेनका गांधी, कहा-क्यों बोते हो गन्ना?

पीलीभीत: गन्ने का उचित मूल्य न मिलने से परेशान किसानों ने वीरवार को केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को अपना दुखड़ा सुनाया। समस्या का समाधान करने की बजाए मेनका गांधी किसानों पर ही भड़क गईं। उन्होंने कहा कि देश को चीनी की जरूरत नहीं है, आखिर आप लोग क्यों उगाते हो गन्ना?

वायरल वीडियो में मेनका गांधी ने कहा, ‘तुम लोग हर बार क्यों आकर मेरी जान खाते हो। ना देश को चीनी की जरूरत है और ना गन्ने की कीमत बढऩे वाली है। हजार बार मैं कह चुकी हूं कि गन्ना मत लगाओ। आप किसी भी अन्य फसल की खेती कर सकते हैं क्योंकि मांग कम हो रही है, जबकि चीनी का उत्पादन बहुत अधिक है।’ 
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जारी किया दूसरा वीडियो
इस खबर के बाद मेनका ने अपना दूसरा वीडियो भी सोसल मीडिया पर वायरल किया। जिसमें वह अपने विवादित बयान पर सफाई देती नजर आईं।

मेनका के बयान पर भड़के सोशल मीडिया यूजर्स 
मेनका गांधी की गन्ना किसानों से बेरुखी पर सोशल मीडिया यूजर्स ने जमकर कमेंटबाजी की। अर्जुन नाम के यूजर ने लिखा, ‘सच बात ये है मैडम जी देहरादून से चुनाव लड़ेंगी इस बार। अब उन्हें पीलीभीत की जनता के लिऐ करना ही नहीं है। कुछ और वैसे भी हर बार जीतने के बाद दिल्ली रुकती है। चुनाव के वक्त ही चेहरा दिखता है।’
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निजी चीनी मिलों ने अधिक गन्ना बुआई को रोकने की अपील की 
बता दें कि उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017-18 में अत्यधिक गन्ना उत्पादन को देखते हुये निजी चीनी मिल मालिकों ने प्रदेश के किसानों से वर्ष 2018-19 के लिए और अधिक गन्ना बुआई रोकने तथा फसल क्षेत्र को कम किये जाने का आग्रह किया है।  
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चीनी उद्योगों ने गन्ना विकास में निवेश किया बंद

आधिकारिक सूत्रों ने आज यहां बताया कि चीनी उद्योगों ने गन्ना विकास में भी निवेश करना बंद कर दिया है जहां वे गन्ना बीज, कीटनाशक और अन्य कृषि सामान गन्ना उत्पादकों को सब्सिडी दरों पर देते थे।   उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती सबसे लोकप्रिय नकदी फसल है। वर्ष 2017-18 सीजन में गन्ना उत्पाद क्षेत्र में 12.5 फीसदी की वृद्धि हुई है। प्रदेश में गन्ने की खेती 20.54 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 23 लाख हेक्टेयर हो गयी है।  चीनी उद्योग हर साल सरकार द्वारा आवंटित मिल के 16 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का गन्ना पिराई के लिये लेते है। पेराई सीजन में उद्योगों को अपने अपने क्षेत्र से गन्ना की आपूर्ति की जाती है। निजी चीनी मिल किसानों से सीधे संपर्क कर गन्ना लेते है और उन्हें सभी साधन उपलब्ध कराते है।  इस बीच, प्रदेश में किसानों की गन्ना बकाया राशि 12 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। लगभग 40 प्रतिशत मिलों में अभी भी पेराई का काम चल रहा है। 

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