ऑफ द रिकॉर्डः क्या रंजन गोगोई होंगे भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश?

नेशनल डेस्कः अटकलबाजियां जोरों पर हैं कि क्या उच्चतम न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश रंजन गोगोई 2 अक्तूबर को सेवानिवृत्त हो रहे मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के उत्तराधिकारी होंगे। इस संबंधी उस समय अनिश्चितता पैदा हुई जब रंजन गोगोई ने 3 अन्य न्यायाधीशों के साथ एक प्रैस कॉन्फ्रैंस में न्यायपालिका के भीतर के कामकाज पर प्रश्र उठाए। यद्यपि गोगोई प्रैस कॉन्फ्रैंस में मौजूद थे, मगर सारा काम जस्टिस चेलमेश्वर और अन्य जजों ने किया। गोगोई की प्रैस कॉन्फ्रैंस में अभूतपूर्व मौजूदगी ने ही उनके जस्टिस मिश्रा के उत्तराधिकारी बनने बारे शंका पैदा कर दी। विशेषकर उस समय जब जस्टिस लोहिया की याचिका की सुनवाई का काम एक विशेष पीठ को देने की पृष्ठभूमि में यह प्रैस कॉन्फ्रैंस हुई थी। जस्टिस चेलमेश्वर जून में सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके बाद गोगोई ही सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं। 1977 के बाद से वरिष्ठता प्रक्रिया को अपनाया जा रहा है।
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उत्तराधिकारी की प्रक्रिया में उस समय विवाद उठा जब मौजूदा मुख्य न्यायाधीश मिश्रा द्वारा सरकार को लिखे एक पत्र में अपने उत्तराधिकारी के नाम की सिफारिश की गई। सरकार इस पत्र के आधार पर आगे कार्रवाई करेगी। इसलिए मुख्य न्यायाधीश 2 अक्तूबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने लिखा कि अगर जस्टिस गोगोई की इच्छा हो तो उनके नाम की वह सिफारिश करते हैं, मगर मोदी सरकार जिस तरह अपनी सत्ता बनाए रखना चाहती है और कॉलेजियम की सिफारिशों पर चलने से इन्कार कर रही है उससे गोगोई के मुख्य न्यायाधीश बनने की सम्भावनाएं अनिश्चित दिखाई देती हैं। कल तक सरकार इस मामले को लेकर असमंजस में थी।
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अब यह बात स्पष्ट होकर सामने आई है कि सरकार एक निश्चित सीमा से अधिक न्यायपालिका के साथ टकराव की स्थिति पैदा करने के लिए कोई खतरा मोल नहीं लेगी और वह भी चुनावी वर्ष में। एम्स में भर्ती होने से पूर्व अरुण जेतली ने इन मामलों में निर्णायक भूमिका निभाई थी क्योंकि जस्टिस गोगोई के कई दशकों से जेतली के साथ निजी संबंध रहे हैं। दूसरा आम सम्पर्क भी इस बात पर काम कर रहा है कि टकराव को खत्म किया जाए। अगर गोगोई को मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है तो वह 17 नवम्बर, 2019 तक इस पद पर रहेंगे और कई मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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