जानें कहा हैं मुस्लिम समुदाय की ये पांच बेइंतहा खूबसूरत इबादतगाहें

ये नहीं देखा तो क्या देखा (VIDEO)
जैसे कि सब जानते हैं हिंदूस्तान में बहुत से तीर्थ स्थल हैं, इसमें केवल हिंदू धर्म नहीं बल्कि सभी धर्मों के धार्मिक स्थान देखनो को मिलते हैं। आज हम बताने वाले हैं मुस्लिम समुदाय की उन मस्जिदों के बारे में जहां की गई अल्लाह की इबादत कभी खाली नहीं जाती। तो चलिए देर न करते हुए आपको कुछ ऐसी मस्जिदों से रूबरू करवाते हैं जिनकी निर्माण शैली को न सिर्फ भारत में बल्कि विदेशों में भी सराहा जाता है। इतना ही नहीं  दूर-दूर से अकीदतमंद यहां अाकर नमाज अता फरमाते हैं। कहा जाता है इन खूबसूरत नक्‍काशीदार मस्जिदों का निर्माण मुगलकाल में हुआ था। जिन्हें बनवाने में कई-कई सालों का लंबा वक्‍त लगा है। आगे जानिए माह-ए-पाक रमजान के मुबारक मौके पर इन खूबसूरत इबादतगाहों के बारे में-

जमाली कमाली मस्जिद और मकबरा
जमाली कमाली मस्जिद और मकबरा दिल्‍ली के महरौली में स्थित  है जिसका निर्माण सिकंदर लोधी ने शुरू करवाया था। कहा जात है कि लाल पत्‍थर और संगमरमर से बनीं यह खूबसूरत मस्जिद सिकंदर के दरबार में रहने वाले सूफी संत जमाली और उनके दोस्‍त कमाली को समर्पित है। परंतु बताया जाता है कि लेकिन सिकंदर के शासनकाल में इसका निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका था। जिस कारण 1528 में बाबर ने दोबारा इसका निर्मा कार्य शुरू करवाया जो 1536 में हुमायुं के शासनकाल में खत्‍म हुआ। मस्जिद के पीछे उनका मकबरा भी है।
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कुव्‍वत उल इस्‍लाम मस्जिद
कुव्‍वत उल इस्‍लाम मस्जिद भी दिल्‍ली में ही स्थित  है। यह मस्जिद इस्‍लामिक कला का बेजोड़ नमूना है। कहा जाता है इसका निर्माण कुतुबुद्दीन हैदर ने शुरू करवाया था। हालांकि इसे पूरा इल्‍तुतमिश और अलाउद्दीन खिलजी ने करवाया था। इस मस्जिद में रायपिथौड़ा स्थित मंदिरों के खंभे लगावाए गए हैं। यही वजह है कि मस्जिद में हिंदू कला की छाप भी देखने को मिलती है।
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नगीना मस्जिद
आगरा किले में स्थित नगीना मस्जिद को खूबसूरती में ताजमहल से भी शानदार माना जाता है। इसे शाही इबादतगाह के रूप में बनवाया गया था। बता दें कि इस मस्जिद में महिलाओं के नमाज़ के लिए अलग से इंतजाम किए गए थे।
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जामिया मस्जिद
जम्मू-श्रीनगर में स्थित जामिया मस्जिद की खूबसूरती भी देखते ही बनती है। इसे अरबी और भारतीय वास्‍तुकला का नायाब नमूना कहा जाता है। यह 370 खंबों पर खड़ी है। कहा जाता है कि इस मस्जिद के अंदर एक बार में तकरीबन 30 हज़ार अकीदतमंद एक साथ नमाज अता फरमा सकते हैं।
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अढ़ाई दिन का झोपड़ा
अजमेर में स्थित मस्जिद का भी अपनी ही अनोखा इतिहास है। कहते हैं पहले यह एक संस्‍कृत कॉलेज था लेकिन मोहम्‍मद गौरी के आदेश पर कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे 1198 में मस्जिद में तब्‍दील कर दिया था। बताय जाता है कि इस मस्जिद का निर्माण केवल ढाई दिन में हुआ था। जिस कारण यहां ढाई दिन का मेला भी लगता है। इसके चलते ही इसे अढ़ाई दिन का झोपड़ा कहते हैं। बता दें कि इस मस्जिद में भारतीय शैली में तैयार किए 70 खंभों का प्रयोग किया गया है।
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