जेट संकटः यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें, महंगा किराया करेगा जेब खाली

नई दिल्लीः 4 साल से नकदी के संकट से जूझ रही जेट एयरवेज ने बुधवार को आधी रात से अस्थायी तौर पर विमानों का परिचालन बंद करने की घोषणा कर दी है। बैंकों द्वारा 400 करोड़ रुपए का एमरजैंसी फंड देने से इंकार करने के बाद कंपनी ने कहा कि सभी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। जेट और बोइंग एयरवेज में मची उथल-पुथल से ट्रैवल और पर्यटन उद्योग बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। चुनाव खत्म होने के बाद यात्रियों की संख्या में और भारी गिरावट देखने को मिलेगी। इन दोनों एयरलाइंस के संकट से देश-विदेश में छुट्टियां मनाने के लिए हॉलीडेज प्लान भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। 

इस वर्ष गर्मियों में उन हजारों परिवारों की छुट्टियों की योजनाएं इस संकट से खटाई में पडऩे की उम्मीद है। आम तौर पर हॉलीडेज प्लान करने वालों को कभी-कभार विमान में सीट नहीं मिलती या फिर किराए बहुत अधिक होते हैं। जब बुकिंग हो जाती है तो है उड़ानों में विलंब हो जाता है जिससे टिकट रद्द करवानी पड़ती है। 

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जेट एयरवेज संकट और घरेलू एयरलाइंस द्वारा बोइंग 737 मैक्स-8 के विमानों को जमीन पर खड़ा किए जाने से यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 

मुम्बई में हवाई अड्डे की रिपेयर का काम चल रहा है जिससे यात्रियों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। इन तीनों कारणों से भारत में बढ़ रहे उड्डयन उद्योग को बड़ा धक्का लगा है। इससे हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन सैक्टर भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। घरेलू करियर के विमानों की स्थिति में दिसम्बर से अब तक 16 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले वर्ष अक्तूबर तक भारत की मासिक हवाई यात्रियों की संख्या 20 प्रतिशत बढ़ी जो फरवरी में गिरकर 7.42 प्रतिशत रह गई। घरेलू एयरलाइंस में यात्रा करने वालों की संख्या में अक्तूबर में 11.85 मिलियन थी जो फरवरी में 11.35 मिलियन रह गई। 

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विशेषज्ञों का मानना है कि जेट का संकट बढऩे के साथ ही यात्रियों की संख्या में 2 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। स्टार एयर कन्सल्टिंग के चेयरमैन हर्षवर्धन ने कहा कि देश में चुनाव के चलते अभी यात्रियों की संख्या में वृद्धि हुई है। उनके अनुसार चुनाव खत्म होने के बाद यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट आने की संभावना है। 

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टिकट दरों में वृद्धि
हालांकि एयरपोर्ट की मुरम्मत का काम खत्म हो गया है लेकिन सीट की कम क्षमता ने एयरलाइंस को किराए में बढ़ौतरी करने का मौका दिया है। लंबे समय तक भारतीय एयरक्राफ्ट्स कंपनियां इंडिगो और स्पाइसजेट जैसे कम लागत वाले वाहक (एल.सी.सी.) उच्च प्रतिस्पर्धा और आक्रामक क्षमता के अतिरिक्त होने के कारण कृत्रिम रूप से कम दरों पर टिकट बेच रहे थे। इंडिगो, जो कि पायलटों की कमी का सामना कर रही है, योजना के अनुसार फ्लाइट्स क्षमता बढ़ाने में सक्षम नहीं है जिसने सीटों की समग्र उपलब्धता पर अतिरिक्त दबाव डाला है। भारत एक मूल्य संवेदनशील बाजार है जहां किराए में वृद्धि कम हवाई यात्रा से मेल खाती है। लगभग 60 प्रति हवाई यात्री कम लागत पर यात्रा करते हैं।

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उड्डयन विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय सभी प्रमुख क्षेत्रों में किराए बढ़े हैं, जिससे कुल मांग घट गई है। विदेश मामलों की शोधकर्त्ता वर्षा जोशी कहती हैं कि उन्हें एक सम्मेलन के लिए संयुक्त राज्य अमरीका के टैक्सास की यात्रा करनी थी। उन्होंने एक सप्ताह पहले टिकट दरों की जांच की लेकिन मेजबानों द्वारा सुझाई गई सामान्य दरों की तुलना में वे बहुत अधिक महंगी थीं। मुझे 2 दिनों तक इंतजार करना पड़ा जब तक कि उन्होंने मेरे लिए एक विकल्प पर काम नहीं किया। एक रियल्टर अनुपम कुमार जो हाल ही में एक समारोह में भाग लेने के लिए कश्मीर गए थे, ने बताया कि टिकटों की दरों में अचानक वृद्धि हो गई। मैं दिल्ली से श्रीनगर का टिकट 4000 रुपए में खरीदूंगा मगर इन दिनों यह 6500 रुपए से कम नहीं है। 

स्पाइसजेट पहले ही बंद कर चुकी है बोइंग-737 की उड़ानें
बुरी तरह से आर्थिक संकट से गुजर रही जेट एयरलाइंस की मुम्बई बेस्ड एयरलाइंस के फ्लीट में 119 विमान थे जिनमें से वह केवल 5वां हिस्सा (26 विमान) संचालित कर रही थी। इससे पहले डायरैक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन के आदेश पर स्पाइसजेट गत माह अपने 75 विमानों के बेड़े में से 13 बोइंग-737 मैक्स-8 हवाई जहाज पहले ही खड़े कर चुकी है। ये सब मुम्बई एयरपोर्ट के रिपेयर वर्क के दौरान हुआ है। मुम्बई एयरपोर्ट पर रोजाना औसतन 950 फ्लाइट्स का आवागमन होता है जबकि रिपेयर के चलते 230 फ्लाइट्स रद्द कर दी गई हैं। 

दूसरे कारण
नकदी संकट, उच्च परिचालन लागत (कर, ईंधन शुल्क और लैंडिंग और पार्किंग दरें) और कम मार्जिन ने घरेलू विमानन क्षेत्र को लगभग सभी एयरलाइनों के साथ संकटपूर्ण स्थिति में डाल दिया है। इंडिगो, स्पाइसजेट और जेट ने शुद्ध लाभ में तिमाही गिरावट दर्ज की है। उदाहरण के लिए जेट ने पिछली तिमाही में 588 करोड़ रुपए का नुक्सान दर्ज किया।

हॉस्पिटैलिटी कारोबार प्रभावित  
एविएशन संकट के चलते 5.9 लाख करोड़ रुपए का पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी कारोबार घाटे में चल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि होटलों में पर्यटकों के कम आवागमन के चलते होटलों ने कमरे की दरों में 5 प्रतिशत तक की कमी कर दी है। विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि अप्रैल के मध्य तक घरेलू अवकाश की मांग उठनी शुरू हो जाएगी। गंतव्य यात्रा, जो आमतौर पर गर्मियों की छुट्टियों के कारण मई-जून में होती है, इस बार प्रभावित होने की संभावना है।
अगले कुछ महीनों में अंतर्राष्ट्रीय पर्यटक भारत नहीं आएंगे। घरेलू यात्री ग्रीष्मकाल में पर्यटन बाजार को चलाते हैं लेकिन संभावना है कि वे अपने खर्च में कटौती करेंगे। 

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