शंखनाद और जयघोष के बीच बंद किए गए बद्रीनाथ मंदिर के कपाट

2020-11-20T10:09:22.717

नेशनल डेस्क: उत्तराखंड में हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं पर स्थित भगवान विष्णु अर्थात, बद्रीनाथ धाम और भगवान शिव की तपस्थली द्वितीय केदार के श्रीमद्यमहेश्वर धाम के कपाट गुरुवार को कार्तिक शुक्ल पंचमी उत्तराषाढ़ा नक्षत्र अभिजीत मुहूर्त में शीतकाल के लिए बंद हो गए। बद्रीनाथ धाम के कपाट आज दोपहर 3 बजकर 35 मिनट पर शीतकाल हेतु विधि-विधान से बंद हो गए है। इस अवसर पर पांच हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। कपाट बंद होने के मौके पर मंदिर को भव्य रूप से पुष्पों से सुसज्जित किया गया। दानी दाताओं ने भंडारे भी आयोजित किए। सम्पूर्ण धाम में अभी बफर् जमी हुई है तथा मौसम अत्यंत शीत बना हुआ है।

PunjabKesari

सेना की बैंड की सुमधुर लहरियों के बीच तीर्थ यात्रियों ने जय बद्री विशाल के उद्घोष किए। ब्रह्म मुहुर्त में आज प्रात: 4.30 बजे मंदिर खुला। पूजा संपन्न हुई। नित्य भोग के पश्चात मध्याह्न 12.30 बजे सांयकालीन आरती शुरू हुई। इसके पश्चात मां लक्ष्मी पूजन शुरू हुआ और अपराह्न एक बजे शयन आरती संपन्न हो गई। इसके पश्चात मुख्य रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी द्वारा द्वारा कपाट बंद की प्रक्रिया शुरू की गई। माणा ग्राम से महिला मंगल द्वारा बुना गया घृत कंबल भगवान बद्रीविशाल को ओढ़ाया गया। लक्ष्मी माता के मंदिर में आगमन होते ही उद्धव जी एवं  कुबेर जी सभा मंडप होते हुए मंदिर प्रांगण पहुंचे। इसी के साथ विभिन्न धार्मिक रस्मों का निर्वहन करते हुए दोपहर ठीक 3 बजकर 35 मिनट पर बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल हेतु बंद हो गए। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने श्री बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के अवसर पर अपने संदेश में देश-विदेश के श्रद्धालुओं को बधाई दी है तथा लोक मंगल की कामना की।

PunjabKesari

आयुक्त गढ़वाल मण्डल और उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोडर् के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविनाथ रमन ने बताया कि इस साल यात्रा में एक लाख 45 हजार से अधिक तीर्थ यात्रियों ने भगवान बद्री विशाल के दर्शन किए। देवस्थानम बोर्ड के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि शुक्रवार सुबह 9.30 बजे उद्धव जी, कुबेर जी, आदि गुरू शंकराचार्य जी की गद्दी रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी सहित योगध्यान बद्री मंदिर पांडुकेश्वर पहुंचेगे। उद्वव जी एवं कुबेर जी शीतकाल में योगध्यान बद्री मंदिर पांडुकेश्वर में निवास करते है, जबकि 21 नवंबर को आदि गुरु शंकराचार्य जी की गद्दी के साथ रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी सहित धर्माधिकारी वेदपाठी गण तथा देवस्थानम बोर्ड के कर्मचारी नृसिंह मंदिर जोशीमठ पहुंचेगे।


Seema Sharma

Recommended News