दिल्ली हाई कोर्ट ने पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला, दुष्कर्म के मामले में सभी आरोपी किए बरी, कहा- ...

punjabkesari.in Monday, Jul 27, 2026 - 12:12 PM (IST)

नेशनल डेस्क: दिल्ली हाई कोर्ट ने दुष्कर्म और घर में घुसने के एक मामले में ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया है। अदालत ने कहा कि घटना के समय पीड़िता सहमति देने की कानूनी उम्र पूरी कर चुकी थी और रिकार्ड से दोनों के बीच संबंध सहमति से बने प्रतीत होते हैं। ऐसे में अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।

न्यायमूर्ति विमल कुमार यादव ने दिलदार की अपील स्वीकार करते हुए नंद नगरी थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़े मामले में भारतीय दंड, संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म) और 457 (रात में घर में घुसपैठ) के तहत सुनाई गई सजा को निरस्त कर दिया। अदालत ने कहा कि घटना वाली रात युवती की मां ने घर में, एक अजनबी को देखकर शोर मचाया, लेकिन बाद की परिस्थितियां यह दर्शाती हैं कि वह व्यक्ति मां के लिए भले अजनबी था, लेकिन युवती उसे पहले से जानती थी। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आरोपित के घर से भागने के बाद युवती भी उसके पीछे चली गई थी।

रिकार्ड के अनुसार, दोनों घटना के बाद कुछ समय तक अलग-अलग स्थानों, जिनमें रैन बसेरा और अन्य ठिकाने ' शामिल थे, पर साथ रहे। बाद में पुलिस ने दोनों को ढूंढ लिया। साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि संबंध जबरन बनाए गए थे। अदालत ने माना कि घटना के समय लागू कानून के अनुसार पीड़िता सहमति देने की कानूनी उम्र पार कर चुकी थी और अभियोजन यह साबित नहीं कर पाया कि संबंध उसकी इच्छा के विरुद्ध बनाए गए थे। बचाव पक्ष ने अदालत के समक्ष मेडिकल और शैक्षणिक अभिलेख पेश करते हुए दावा किया कि पीड़िता की जन्मतिथि 27 अगस्त 1996 थी। इसलिए उस समय उसकी आयु 16 घटना दो सितंबर 2012 की है, वर्ष से अधिक थी।

बता दें कि 3 फरवरी 2013 से पहलें (2012 में लागू कानून) आइपीसी की धारा आयु की लड़की यदि किसी के साथ 375 के तहत 16 वर्ष से अधिक सहमति से संबंध बनाती थी, तो उसे दुष्कर्म नहीं माना जाता था। (हालांकि अन्य कानूनी पहलू अलग हो सकते थे) । निर्भया कांड के बाद 2013 के आपराधिक कानून संशोधन के बाद सहमति की उम्र 16 से बढ़ाकर 18 वर्ष कर दी गई।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Ramkesh

Related News