'भारतीय सेना में आपके लिए कोई जगह नहीं...' जानें क्यों ईसाई अधिकारी को SC ने लगाई फटकार

punjabkesari.in Tuesday, Nov 25, 2025 - 04:47 PM (IST)

नेशनल डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भारतीय सेना का चरित्र धर्मनिरपेक्ष है और वहां अनुशासन को सर्वोपरि स्थान दिया जाता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति जो व्यक्तिगत आस्था के आधार पर रेजिमेंट के धर्मस्थल में जाने से मना कर दे, वह सेना में रहने के योग्य नहीं हो सकता। यह टिप्पणी चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने एक बर्खास्त अधिकारी की याचिका खारिज करते हुए की।

सैमुअल कमलेसन की बर्खास्तगी
मामला 2017 में भर्ती हुए सैमुअल कमलेसन का है, जिन्हें लेफ्टिनेंट के रूप में थर्ड कैवेलरी रेजिमेंट में शामिल किया गया था। यह रेजिमेंट मुख्य रूप से सिख, जाट और राजपूत सिपाहियों से बनी थी। उन्हें स्क्वाड्रन बी का ट्रूप लीडर बनाया गया, जिसमें सिख सिपाही थे। रेजिमेंट की व्यवस्था के अनुसार, उन्हें हर सप्ताह धार्मिक परेड का नेतृत्व करना था, जिसमें सैनिक धर्मस्थल जाते थे। लेकिन सैमुअल ने यह कहते हुए इस परेड में हिस्सा लेने से मना कर दिया कि रेजिमेंट में केवल मंदिर और गुरुद्वारा हैं, और ईसाई होने के नाते वह इन धर्मस्थलों में प्रवेश नहीं करेंगे।

सैमुअल की इस स्थिति को लेकर सेना के अधिकारियों ने कई प्रयास किए। उन्हें समझाने के लिए दूसरे ईसाई अधिकारियों और स्थानीय पादरी ने भी मदद की, जिन्होंने बताया कि सामूहिक धर्मस्थल में जाने से उनकी ईसाई आस्था को कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा। हालांकि, सैमुअल पर कोई असर नहीं पड़ा।

बर्खास्तगी और हाई कोर्ट का फैसला
सभी प्रयासों के असफल होने के बाद, थल सेना प्रमुख के आदेश पर 3 मार्च 2021 को सैमुअल को पेंशन और ग्रेच्युटी के बिना सेना से बर्खास्त कर दिया गया। उन्होंने इस निर्णय को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी, जहां मई 2023 में हाई कोर्ट के जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की बेंच ने उनकी बर्खास्तगी को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि सशस्त्र सेनाएं अपनी वर्दी के कारण एकजुट रहती हैं, और धर्म के आधार पर विभाजित नहीं होतीं। यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता का नहीं था, बल्कि वरिष्ठ अधिकारी के वैध आदेश का पालन करने का था।

अब, सुप्रीम कोर्ट ने भी सैमुअल की बर्खास्तगी को सही ठहराते हुए कहा कि उन्होंने न केवल अनुशासनहीनता की, बल्कि अपने आचरण से रेजिमेंट के साथियों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई। कोर्ट ने सेना के अनुशासन को सर्वोपरि मानते हुए इस निर्णय को बरकरार रखा।


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Content Editor

Shubham Anand

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