ऑफ द रिकॉर्डः प्रवर्तन निदेशालय के बाद गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय का भी ‘प्रदर्शन निराशाजनक’

2020-11-26T03:24:05.833

नेशनल डेस्कः यदि प्रवर्तन निदेशालय (ई.डी.) 15 वर्षों में केवल 14 मामलों में दोष सिद्ध कर सका है, तो कॉर्पोरेट घरानों के धोखाधड़ी जांच मामले में अन्य प्रमुख एजैंसी का भी ट्रैक रिकॉर्ड बेहतर नहीं है। कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय की निगरानी में कार्य करने वाले गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एस.एफ.आई.ओ.) का विनाशकारी नहीं होना भी निराशाजनक है। वहीं एस.एफ.आई.ओ. अपने कार्य में बहुत स्वतंत्र है, यहां तक कि जांच दौरान गिरफ्तार करने और जांच को संचालित करने की शक्तियां उसके पास हैं। सरकार ने निगमों और कंपनियों द्वारा गंभीर धोखाधड़ी से निपटने के लिए एस.एफ.आई.ओ. की स्थापना की थी। 

आंकड़े बताते हैं वर्ष 2017-18 के दौरान एस.एफ.आई.ओ. ने 132 कंपनियों की जांच की है लेकिन केवल 5 मामलों में ही यह जांच पूरी कर सका। वहीं 2018-19 में भी रिकॉर्ड अच्छा नहीं था, जब यह 12 मामलों में ही जांच पूरी कर सका, हालांकि इसने 83 कंपनियों में जांच शुरू की थी। 2019-20 में सबसे बुरा तब हुआ जब 361 कंपनियों की जांच शुरू की और केवल 12 मामलों में जांच पूरी हुई। लोकसभा में भाजपा सांसद दुष्यंत सिंह के एक सवाल के जवाब में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री अनुराग ठाकुर ने खुलासा किया कि एस.एफ.आई.ओ. द्वारा 92 मामलों की जांच की जा रही है।

हालांकि, उन्होंने उस सवाल को टाल दिया, जिसमें धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों के शीर्ष 50 मामलों का ब्यौरा दिया गया था, जिसमें कहा गया था कि ‘राशि के मामलों की चल रही जांच के पूरा होने के बाद मामलों के ग्रेडिंग की जानकारी हो सकती है।’  एक अन्य सवाल के जवाब में सरकार ने दावा किया कि दायर की गई 1182 शिकायतों में से 462 शिकायतों का निपटारा किया गया और 326 मामलों में दोषी ठहराया गया है। लेकिन जब पिछले 3 वर्षों के एस.एफ.आई.ओ. के प्रदर्शन का रिकॉर्ड सामने आया तो उसकी कारगुजारी का पर्दाफाश हो गया। 


Pardeep

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